अनाज की क़ीमतों में तेज़ी के आसार

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संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस साल फ़सलों की रेकॉर्ड पैदावार के बावजूद दुनिया भर में खाद्दान्नों की कीमत ऊंची रहेगी.

संयुक्त राष्ट्र के खाद्द और कृषि संगठन के विश्लेषण के अनुसार पैदावार में जो बढ़ोतरी हुई मांग उससे और ज़्यादा हो गई है और इसलिए कीमतें आकाश चूमेंगी.

संगठन का कहना है कि ऊंची क़ीमतों के कारण ग़रीब देशों को खाद्दान्न के आयात के लिए 30 प्रतिशत ज़्यादा क़ीमत चुकानी होगी.

इसका मतलब ये होगा कि इन देशों के कुल आयात का 18 प्रतिशत खाद्दान्न पर खर्च होगा जबकि दुनिया का औसत सात प्रतिशत का है.

संगठन का कहना है कि दुनिया भर में ज़्यादातर फ़सलों का क्या हाल रहेगा ये देखने के लिए अगले कुछ महीने अहम होंगे.

संगठन का कहना है कि रूस और यूक्रेन जैसे कुछ देशों में आसार अच्छे नज़र आ रहे हैं लेकिन कम या ज़्यादा बारिश यूरोप और उत्तर अमरीका में मक्के और गेहूं की फ़सल को नुकसान पहुंचा सकती है.

पिछले साल सूखे के कारण रूस ने अनाज के निर्यात पर रोक लगा दी थी और यूक्रेन ने भी देश के बाहर अनाज की बिक्री को सीमित कर दिया था.

Image caption कम या ज़्यादा बारिश यूरोप और उत्तर अमरीका में मक्के की फ़सल को नुकसान पहुंचा सकती है.

वहां इस साल मौसम अच्छा है और इससे उम्मीद है कि निर्यात सामान्य हो जाएंगे और दुनिया भर में अनाज की पैदावार रेकॉर्ड स्तर तक जाएगी.

चावल और मछली की पैदावार के बारे में भी उम्मीद जताई जा रही है कि पैदावार काफ़ी अच्छी होगी.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का कहना है कि साल की शुरूआत में लग रहा था कि आपूर्ति अच्छी रहेगी.

लेकिन उसके बाद पासा अजीब तरह से पलटा. मौसम ख़राब हुआ, जापान में भारी भूकंप आया और उत्तर अफ़्रीका और मध्यपूर्व में राजनीतिक उथल-पुथल की लहर दौड़ पड़ी.

तेल की कीमत में भारी बढ़ोतरी का भी असर हुआ है.

तेल की बढ़ती कीमत से खाद्दान्नों की कीमत भी बढ़ी क्योंकि उसका सीधा असर उत्पादन और एक जगह से दूसरे जगह लाने ले जाने पर पड़ता है.

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