मारुति में हड़ताल पर प्रबंधन सख़्त

मारुति गाड़ियां
Image caption कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से गाड़ियों के निर्माण पर बुरा असर पड़ा है.

भारत में सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति और उसके कर्मचारियों के बीच शनिवार को शुरू हुआ गतिरोध तीसरे दिन भी जारी रहा. लेकिन सोमवार को मारुति सुज़ुकी इंडिया ने 11 कर्मचारियों को बर्ख़ास्त कर दिया.

कर्मचारियों का कहना है कि यूनियन के 11 सदस्यों के खिलाफ़ उठाए गए अनुशासन संबंधी कदम को वापस लिया जाए.

कंपनी के अध्यक्ष आरसी भार्गव ने कड़ा रुख़ अपनाते हुए समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "11 लोगों को इसलिए बर्ख़ास्त किया गया क्योंकि वे दूसरे कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने के लिए उकसा रहे थे. मारुति में कोई दूसरा यूनियन नहीं है. अगर उनकी कोई समस्याएं हैं भी, तो उन्हें हमें बताना चाहिए था."

उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस मसले को जल्द से जल्द सुलझा लिया जाएगा.

हरियाणा स्थित मानेसर में मारुति के सबसे बड़े प्लांट के लगभग 2000 कर्मचारी नया मज़दूर यूनियन गठित किए जाने की मांग को लेकर शनिवार को हड़ताल पर चले गए थे.

कर्मचारियों की हड़ताल का मारुति की गाड़ियों के निर्माण पर बुरा असर पड़ा है. आम तौर पर मानेसर स्थित प्लांट में एक दिन में 1,300 गाड़ियों का निर्माण किया जाता है, लेकिन हड़ताल की वजह से हर दिन अनुमान से 650 कम गाड़ियों का निर्माण हुआ है.

मारुति कंपनी के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, “स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है. प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच अभी किसी प्रकार की सुलह नहीं हो पाई है. हालांकि रविवार के दिन हुई हड़ताल का हमारे कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है क्योंकि उस दिन वैसे भी कर्मचारियों की छुट्टी होती है.”

हड़ताल पर गए कर्मचारियों की मांग है कि उनके लिए एक नया कर्मचारी यूनियन बनाया जाए, जिसके सदस्य मानेसर प्लांट के कर्मचारी हों.

मांग

कर्मचारियों का कहना है कि फ़िलहाल कंपनी में जो मजदूर यूनियन है, उसमें ज़्यादातर सदस्य मारुति के गुड़गांव स्थित प्लांट के हैं और उनकी समस्याएं वहां काम कर रहे कर्मचारियों के मुद्दों से बिलकुल अलग हैं.

साथ ही उनकी ये भी मांग है कि प्लांट में बन रही दो नई यूनिट के कर्मचारियों के अनुबंध पत्र को पक्का किया जाए.

समाचार एजेंसी पीटीआई का कहना है कि हालांकि मैनेजमेंट और कर्मचारियों के बीच इन मांगों को लेकर बैठक हुई है, लेकिन कोई नतीजा अभी तक नहीं निकल पाया है और गतिरोध जारी है.

इससे पहले मारुति के कर्मचारियों ने साल 2000 के नवंबर से लेकर 2001 में जनवरी तक बहुत बड़ी हड़ताल की थी, जिससे गाड़ियों के निर्माण पर बहुत बुरा असर पड़ा था.

मारुति के मानेसर स्थित प्लांट के भीतर दो नए यूनिट बनाए जा रहे हैं, जिसमें 3,625 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा.

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