नई उत्पादन नीति पर महत्वपूर्ण बैठक

स्टील का उत्पादन
Image caption इस नीति का मक़सद मज़दूरों से जुडे कानूनों को नर्म करना और उत्पादन को बढ़ाना बताया जा रहा है

गुरुवार को दिल्ली में हो रही एक उच्च-स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समक्ष नई उत्पादन नीति का मसौदा पेश किया जा रहा है.

अभी ये साफ़ नहीं है क्या इस बैठक में इस नीति पर और बहस होगी या फिर हरी झंडी दे दी जाएगीं. इस नीति का मक़सद मज़दूरों से जुड़े कानूनों को नर्म करना और उत्पादन को बढ़ाना बताया जा रहा है.

इस मसौदे के मुताबिक सरकार का इरादा ज़मीन का एक बैंक बनाने का है जो उद्योगों के लिए ज़रूरी ज़मीन उपलब्ध कराएगा.

2025 तक दस करोड़ नौकरियाँ

वरिष्ठ अर्थशास्त्री आलोक पुराणिक कहते हैं, "इस नीति से बहुत फ़र्क पड़ने वाला नहीं है क्योंकि भारत में निजी रिएल इस्टेट कंपनियों का ज़बरदस्त दबदबा है और भट्टा परसौल जैसे मुद्दों से निपटने के लिए ज़रूरी है कि सरकार बिचौलिए की भूमिका निभाने की बजाय ज़मीन की खरीदारी का काम कंपनियों पर छोड़ दे."

इस नीति का मक़सद वर्ष 2025 तक 10 करोड़ नई नौकरियाँ पैदा करना है. साथ ही कोशिश होगी विदेशी निवेश और तकनीक को प्रोत्साहन देना, और कंपनियों की कानूनी ज़िम्मेदारियों को कम करना.

रिपोर्टों में ये भी कहा जा रहा है कि सरकार मज़दूरों के अधिकारों की सुरक्षा करेगी, लेकिन आलोक पुराणिक इससे सहमत नहीं है और वो कहते हैं कि सामान के दाम कम करने की फ़िराक में कंपनियों मज़दूरी कम कर रही हैं.

इस नई उत्पादन नीति की कोशिश होगी देश के सकल घरेलु उत्पाद में उत्पादन के योगदान को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर अगले 15 सालों में 25 प्रतिशत तक ले जाना.

ये नीति राष्ट्रीय निवेश और उत्पाद को बढ़ावा देगी ताकि विश्वस्तरीय शहरी केंद्र बन सकें और मज़दूरों को काम मिल सके.

भारतीय कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वो विदेशी तकनीकों को तो सीखें हीं, देसी तकनीक को भी बढ़ावा देंगे.

इस बारे में वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रोमोशन बोर्ड की भी स्थापना का प्रस्ताव है जिसकी ज़िम्मेदारी होगी विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकार की एजेंसियों के बीच तालमेल करना.

ये नीति योजना आयोग, राष्ट्रीय उत्पादन प्रतियोगितात्मकता समिति या नेशनल मैन्युफ़ैक्चरिंग कंपिटीटिवनेस काउंसिल और डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडस्ट्रियल पॉलिसी ऐंड प्रोमोशन ने मिलकर बनाया है.

इस नीति में कपड़ा उद्योग, चमड़ा. रत्न, जवाहरात और खाद्य संसाधन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलेगी.

55 लाख बीडी़ मज़दूरों की स्वास्थ्य योजना

उधऱ कैबिनेट ने एक प्रस्ताव पास किया जिसके मुताबिक देश के करीब 55 लाख बीड़ी मज़दूरों को जल्द ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत चिकित्सीय सुविधाएँ मिल सकेंगी.

इस प्रस्ताव के मुताबिक मज़दूरों को ये सुविधाएँ वर्ष 2013-14 के दौरान मिल पाएंगी.

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में हुए फ़ैसले के मुताबिक देश भर में मौजूद बीड़ी मज़दूरों को इस योजना का लाभ मिल सकेगा और इस पर करीब 311 करोड़ रुपए खर्च होंगे.

मज़दूर और रोज़गार मंत्री मल्लिकार्जुन खाड़गे ने दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि इस योजना से करीब 10 लाख बीड़ी मज़दूरों को फ़ायदा होगा.

इस योजना के अंतर्गत किसी भी मज़दूर और उसके परिवार के पाँच सदस्यों तक को 30,000 रुपए तक का चिकित्सा बीमा मिलेगा.

अगर इलाज में 30,000 से ज़्यादा पैसा खर्च होता है तो वेलफ़ेयर कमिशनर अस्पताल को सीधे बाकी धन की भरपाई करेगा.

खाड़गे के मुताबिक योजना का फ़ायदों मज़दूरों तक पहुँचाने के लिए उन्हें स्मार्ट कार्ड्स दिए जाएंगे ताकि उन्हें चुने हुए अस्पतालों में मुद्रा के लेन-देन के बिना सुविधाएँ मिल सकें.

हर मज़दूर को स्मार्ट कार्ड के लिए 30 रुपए देने होंगे.

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