वर्चुअल मुद्रा साइबर हमले की शिकार

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Image caption कम्प्यूटर हैकिंग से वर्चुअल मुद्रा में भारी गिरावट

साइबर स्पेस को पहली बार वर्चुअल मुद्रा में भारी गिरावट झेलनी पड़ी है.

इस मुद्रा को 'बिटकॉइन' के नाम से जाना जाता है.

'बिटकॉइन' का कोई भौतिक रूप नहीं है. कुछ वेबसाइटों पर इसे सामान या सेवाएं ख़रीदने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

हालांकि इसे असली धन में परिणित किया जा सकता है.

कुछ दिन पहले तक एक 'बिटकॉइन' की क़ीमत लगभग 17 डॉलर थी लेकिन हैकरों के हमले के बाद ये लुढ़कर कर शून्य के पास पहुंच गई.

हैकरों ने चुराई हुई वर्चुअल मुद्रा से बाज़ार भर दिया जिसका नतीजा ये हुआ कि 'बिटकॉइन' मूल्यहीन हो गई.

'बिटकॉइन' एक डिजिटल मुद्रा है जिसे दो साल पहले जापान के एक कम्प्यूटर विशेषज्ञ ने तैयार किया था.

इसके पीछे विचार ये था कि ऐसी मुद्रा बनाई जाए जो किसी सरकार या केंद्रीय बैंक के नियंत्रण में न हो.

नियंत्रण नहीं

'बिटकॉइन' पर कोई केंद्रीय नियंत्रण नहीं है लेकिन इसके प्रसार का नियमन करने के लिए कुछ जटिल प्रक्रियाएं अवश्य हैं.

समझा जाता है कि ये साइबर अपराधियों और कम्प्यूटर हैकरों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है.

लेकिन 'बिटकॉइन' के कई वैध उपयोग भी हैं.

कुछ दिन पहले तक सब ठीक चल रहा था और 'बिटकॉइन' की क़ीमत शून्य से 17 डॉलर जा पहुंची थी.

लेकिन फिर अज्ञात हैकरों ने उस वेबसाइट पर हमला किया जिसका इस्तेमाल वर्चुअल मुद्रा को असली मुद्रा में बदलने के लिए किया जाता है.

और अचानक चुराई हुई वर्चुअल मुद्रा की बाढ़ सी आ गई जिससे 'बिटकॉइन' की क़ीमत गिर गई.

लेकिन 'बिटकॉइन' के एक वरिष्ठ अधिकारी गेविन ऐंड्रेसन का कहना है कि ये एक झटका ज़रूर है लेकिन महासंकट नहीं है.

उन्होने आशा व्यक्त की कि इससे उन वेबसाइटों पर सुरक्षा कड़ी की जाएगी जहां ये बेची या ख़रीदी जाती है.

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