डीज़ल, केरोसिन की क़ीमतों में बढ़ोतरी

इमेज कॉपीरइट Reuters

पेट्रोल के बाद अब डीज़ल, एलपीजी और केरोसिन के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं. केंद्र सरकार ने इन पदार्थों की क़ीमत बढ़ाने का फ़ैसला किया है.

डीज़ल अब तीन रुपए और महंगा होगा जबकि एलपीजी का दाम 50 रुपए प्रति सिलेंडर बढ़ाया गया है.केरोसिन दो रुपए प्रति लीटर के हिसाब से महंगा पड़ेगा.

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह ने शुक्रवार शाम को बैठक की और नए दामों को मंज़ूरी दी.

पिछले साल जून में डीज़ल की क़ीमत दो रुपए बढ़ाई गई थी. तृणमूल कांग्रेस ने इस बढ़ोतरी का विरोध किया है.

इससे पहले 2011 में जून के शुरु में पेट्रोल की क़ीमतों में पाँच रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की गई थी. तब तेल कंपनियों का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की क़ीमतों में हुई भारी बढ़ोत्तरी की वजह से पेट्रोल का दाम बढ़ाना पड़ा है.

अहम फ़ैसला

इस बढ़ोत्तरी का फ़ैसला केंद्रीय मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह ने शुक्रवार देर रात तक चली बैठक में किया.

पेट्रोलियम मंत्री एस जयपाल रेड्डी ने बैठक के बाद बताया कि कच्चे तेल पर सीमा शुल्क 5 फीसदी कम कर दिया गया है.

इसके साथ ही डीजल पर सीमा शुल्क 7.5 फीसदी से घटकर 2.5 फीसदी रह गया है.

रिटेल मूल्य में ज्यादा इजाफा नहीं हो, इसका खयाल करते हुए सरकार ने डीजल पर उत्पाद शुल्क 4.60 रुपये से घटाकर 2 रुपये प्रति लीटर कर दिया है.

उन्होंने बताया कि सरकार को उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क में कटौती के कारण चालू वित्त वर्ष के दौरान कम से कम 49,000 करोड़ रुपये का राजस्व गंवाना पड़ेगा.

साथ ही जयपाल रेड्डी ने ये भी बताया कि तेल कंपनियों को इसका फायदा होगा और उनके घाटे में 21,000 करोड़ रुपये की कमी आएगी.

लेकिन प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार के इस क़दम की निंदा करते हुए कहा है कि बढ़े दामों से साफ़ हो गया है कि ये सरकार आम आदमी के लिए नहीं है.

वहीँ तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने बढ़े दामों को 'अस्वीकार्य' बताया है.

उन्होंने कहा कि इन तीनों चीज़ों के दाम बढ़ने से सबसे ज़्यादा नुकसान ग़रीब लोगों को होगा और सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए.

संबंधित समाचार