मर्डोक के मीडिया साम्राज्य पर ख़तरा

Image caption समिति के सामने रूपर्ट ने ज़्यादातर सवालों के जवाब में कहा- 'मुझे नहीं मालूम.'

न्यूज़ कॉर्पोरेशन के शेयरधारकों को पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान भारी हानि उठानी पड़ी थी. कंपनी के शेयर भाव नीचे जाने के पीछे निवेशकों की ये चिंता थी कि क्या फ़ोन हैकिंग विवाद की काली छाया मर्डोक के मीडिया साम्राज्य के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ेगी?

लेकिन मंगलवार को ब्रितानी संसद की मीडिया मामलों की स्थाई समिति के सामने रूपर्ट मर्डोक और उनके पुत्र जेम्स मर्डोक की पेशी के बाद शेयर बाज़ार में न्यूज़ कॉर्पोरेशन की स्थिति में अच्छा-ख़ासा सुधार देखने को मिला.

ऐसा नहीं है कि रूपर्ट और जेम्स ने संसदीय समिति के सामने बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन ये तो साफ़ है कि समिति के सदस्य मर्डोक पिता-पुत्र को अपने सवालों से पूरी तरह घेर नहीं पाए.

यहाँ उल्लेखनीय है कि शेयरधारकों को शेयर भाव में सुधार से थोड़ा संतोष ज़रूर हुआ है, लेकिन वे अब भी ख़ुश नहीं हैं.

न्यूज़ कॉर्पोरेशन कोई सामान्य कंपनी नहीं है. संस्थापक रूपर्ट मर्डोक का कंपनी पर नियंत्रण है, और पुत्र जेम्स को उनके उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है.

इस कंपनी के शेयरों के बीच भी इसी आधार पर विभेद है. मसलन कुछ शेयरों के साथ उसके धारकों को कंपनी के मामलों में मतदान का अधिकार दिया गया है, तो बाक़ियों के साथ नहीं.

वोटिंग अधिकार वाले शेयरों में से क़रीब 40 प्रतिशत मर्डोक के हाथ में है, यानि सार्वजनिक कंपनी होने के बाद भी एक तरह से कंपनी उनके क़ब्ज़े में है. कई शेयरधारकों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति उठाई है.

पहले भी इस बारे में चिंता व्यक्त की जाती रही है लेकिन फ़ोन हैकिंग विवाद सामने आने के बाद से ये मामला नए सिरे से उठाया जा रहा है.

मर्डोक डिस्काउंट

एक संस्थागत निवेशक ने कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अध्यक्ष के पदों को अलग करने की माँग उठाई है. उल्लेखनीय है कि अभी दोनों ही पद रूपर्ट मर्डोक के पास हैं.

सवाल जेम्स मर्डोक को कंपनी में रूपर्ट के उत्तराधिकारी के रूप में पेश किए जाने को लेकर भी उठे हैं.

आज की स्थिति में ये संभव है कि कंपनी पर मर्डोक की पकड़ कमज़ोर होने से शेयरधारकों को फ़ायदा हो सकता है.

कंपनी से जुड़े मर्डोक के कई फ़ैसलों को व्यावसायिक ग़लतियो को रूप में पेश किया जा रहा है, जिनके चलते बाज़ार में न्यूज़ कॉर्पोरेशन के शेयरों की क़ीमत अपेक्षित से कम आंकी जाती है.

अपेक्षित और वास्तविक क़ीमतों में इस अंतर को ‘मर्डोक डिस्काउंट’ के नाम से जाना जाता है. संभव है कंपनी प्रबंधन में बदलाव के बाद ये डिस्काउंट समाप्त हो जाए.

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