अनिश्चितता का सामना करने को तैयार रहें: रिज़र्व बैंक

आरबीआई

आरबीआई की प्राथमिकता रुपए और विदेशी मुद्रा की उपलब्धता को बनाए रखना है

भारत के केंद्रीय बैंक रिज़र्व बैंक ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही गतिविधियों से अलग नहीं है और भारत के नीति व नियामक तंत्र को वित्तीय बाज़ारों के उतार-चढ़ाव से पैदा हो रही परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

भारत के केंद्रीय बैंक रिज़र्व बैंक यानि आरबीआई ने कहा है कि अमरीकी क्रे़डिट रेटिंग के घटाए जाने के बाद अनिश्चितता बढ़ी है और वह लगातार इसका भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाज़ारों पर हो रहे असर पर नज़र रख रहा है.

सोमवार को आरबीआई की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "आरबीआई लगातार सभी अहम पहलुओं पर नज़र रख रहा है. रुपए, विदेशों से आने वाले निवेश और व्यापक आर्थिक स्थिरता पर असर करने वाली अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का लगातार आकलन जारी रहेगा. हम बदलते परिदृश्य में जल्दी और उचित ढंग से क़दम उठाएँगे."

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर की ओर से अमरीका की क्रेडिट रेटिंग को शुक्रवार को घटा दिया गया था.

हाल की वित्तीय मंदी के सबसे बुरे दौर के समय भी भारतीय अर्थव्यवस्था 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी जिससे संकेत मिलते हैं कि भारत के अंदरूनी हालात के कारण अर्थव्यवस्था मज़बूत है. हमारी इस समय प्राथमिकता है कि रुपए और विदेशी मुद्रा के भंडार और उपलब्धता को बाज़ार में बनाए रखें ताकि उतार-चढ़ाव के कारण ब्याज दरें और एक्सचेंज दरों में ज़्यादा उतार-चढ़ाव न हों

आरबीआई का बयान

गुरुवार-शुक्रवार को अमरीकी शेयर बाज़ार में 2008 के वित्तीय संकट के बाद से न्यूयॉर्क के डाओ जोंस सूचकांक में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई थी.

क्रेडिट रेटिंग के मूल्यांकन पर निर्भर करता है कि उधार लेने वाले देश (अमरीका) की माली हालत कैसी है और उसकी उधार लौटाने की क्षमता कितनी है.

रुपए, विदेशी मुद्र की उपलब्धता

आरबीआई का कहना है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था के बारे में क्रेडिट एजेंसी कि निर्णय के कारण वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में खलबली की चिंताएँ बढ़ी हैं.

इसका कारण यह है कि निवेशक एक जगह से निकालकर दूसरी जगह निवेश कर रहे हैं ताकि वे अपने निवेश को ख़तरे से सुरक्षित रख सकें.

आरबीआई के बयान में कहा गया है, "हाल की वित्तीय मंदी के सबसे बुरे दौर के समय भी भारतीय अर्थव्यवस्था 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी जिससे संकेत मिलते हैं कि भारत के अंदरूनी हालात के कारण अर्थव्यवस्था मज़बूत है. हमारी इस समय प्राथमिकता है कि रुपए और विदेशी मुद्रा के भंडार और उपलब्धता को बाज़ार में बनाए रखें ताकि उतार-चढ़ाव के कारण ब्याज दरें और एक्सचेंज दरों में ज़्यादा उतार-चढ़ाव न हों."

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