'कई महीने जारी रहेगी महंगाई'

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट से सरकार को महंगाई कम होने की उम्मीद है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आर्थि‍क सलाहकार परि‍षद के अध्‍यक्ष डॉ. सी रंगराजन ने कहा है कि मार्च 2012 से पहले महंगाई कम होने के आसार नहीं हैं.

दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता में आर्थि‍क दृष्‍टि‍कोण 2011-12 जारी करते हुए उन्होंने कहा कि अगले मार्च 2012 तक महंगाई की दर 6.5 फीसदी हो जाएगी.

एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत में महंगाई की दर सबसे ज़्यादा है और ये लगभग 10 प्रतिशत के आस-पास है.

रंगराजन ने बताया कि वर्ष 2010-11 में अच्छी फसल के चलते खाद्य पदार्थों की क़ीमतें कम हुई हैं और उपलब्‍ध खाद्यान्‍न भंडार के चलते ये और कम होने की संभावना है.

उन्होंने कहा, "इसका असर ग़ैर-खाद्य क़ीमतों यानी औद्योगिक क्षेत्र पर भी पड़ेगा लेकिन इसमें समय लगेगा, जिसकी वजह से महंगाई अभी बनी रहेगी."

रंगराजन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थिति में सुधार की उम्मीद है और इसके साथ ही सरकार भी महंगाई पर काबू पाने के लिए कई क़दम उठा रही है.

कड़ी नीति

उन्होंने बताया कि इसके लिए सुनिश्चित करना होगा कि वित्तीय घाटे को बजटीय स्तर तक सीमित रखा जाए.

साथ ही महंगाई दर कम आने तक मु्द्रा नीति भी कड़ी ही रहेगी. गौरतलब है कि सरकार की मुद्रा नीति के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक पिछले सोलह महीनों में ग्यारह बार ब्याज़ दरें बढ़ा चुका है.

हालांकि रंगराजन का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती तेल क़ीमतें वित्तीय घाटे को सीमित रखने में अड़चन पैदा कर सकती हैं.

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें स्थिर हैं लेकिन पिछले कुछ महीनों में ये तेज़ी से बढ़ीं थी.

इसी के मद्देनज़र सरकार ने तेल कीमतें तो बढ़ाई हीं साथ ही तेल कंपनियों को कर में राहत भी दी. रंगराजन का कहना था कि अगर तेल कीमतें फिर बढ़ीं तो इसका असर सरकार के बजट पर पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि मध्यम अवधि में सरकार को अतिरिक्त आमदनी के दो ही स्रोत दिखाई दे रहे हैं.

उनका कहना था कि अगर इस वित्तीय वर्ष में गुड्स एन्ड सर्विसिज़ टैक्स और डायरेक्ट कर प्रणाली लागू हो जाए तो इससे सरकार को फ़ायदा होगा.

संबंधित समाचार