क्या है रेटिंग एजेंसी ?

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एएए, बीबीबी, सीए, सीसीसी, सी, डी देखने में किसी छोटे स्कूली बच्चे के रिपोर्ट कार्ड की तरह लगते हैं.

जी हाँ ये एक तरह से मूल्यांकन ही हैं लेकिन किसी स्कूली बच्चे का नहीं बल्कि देशों, बड़ी कंपनियों या बड़े पैमाने पर उधार लेने वालों का मूल्यांकन है.

इस मूल्यांकन पर निर्भर करता है कि उधार लेने वाले की माली हालत कैसी है और उनकी उधार लौटाने की क्षमता कितनी है. अच्छे मूल्यांकन का अर्थ है कम ब्याज पर आसानी से क़र्ज़. ख़राब मूल्यांकन का मतलब है ऊंची दरों पर मुश्किल से क़र्ज़.

कौन हैं बड़े खिलाड़ी

इस समय रेटिंग की दुनिया में तीन बड़े नाम हैं. स्टैण्डर्ड एंड पूअर, मूडीज़ और फ़िच.

इनमे सबसे पुरानी एजेंसी है स्टैण्डर्ड एंड पूअर जिसकी नींव 1860 में हेनरी पूअर ने रखी थी. पूअर ने अमरीका में नहरों और रेल नेटवर्क के वित्त का इतिहास लिखा था.

साल 1906 में ग़ैर रेल कंपनियों के वित्त की जांच शुरू हुई तब स्टैण्डर्ड स्टैटस्टिक ब्यूरो की स्थापना हुई. इन दोनों कंपनियों का 1940 के दशक में विलय हो गया.

साल 1909 में जॉन मूडी ने मूड़ीज़ की स्थापना की. मूडीज़ ने भी रेल वित्त की साख का विश्लेषण और उनका मूल्यांकन करना शुरू किया.

आज दुनिया के रेटिंग व्यवसाय के क़रीब 40 फ़ीसदी कारोबार इन्हीं दो कंपनियों के पास है.

फ़िच इन्हीं दोनों कंपनियों का एक छोटा रूप है. इसके अलावा भी कम्पनियां हैं जिन्हें इतना महत्त्व नहीं दिया जाता.

इन कंपनियों का दबदबा क्यों है

इसके ख़ास कारणों में से एक है अमरीका की वित्तीय निगरानी करने वाली एजेंसी सिक्योरिटीज़ ऐंड एक्सचेंज कमीशन.

साल 1975 में इस कमीशन ने इन तीन कंपनियों को मान्यता प्राप्त सांख्यिकीय रेटिंग एजेंसी घोषित कर दिया.

इससे उधार लेने की इच्छुक कंपनियों और देशों का जीवन आसान हो गया और इन एजेंसियों ने उनकी वित्तीय हालत और साख का आकलन कर उन्हें रेटिंग देना शुरू कर दिया.

इन रेटिंग एजेंसियों की ताक़त तब और बढ़ गई जब सिक्योरिटीज़ ऐंड एक्सचेंज कमीशन ने आदेश दिया कि सरकारी नियंत्रण वाले निवेश संस्थान केवल ऊंची रेटिंग वाली कंपनियों में ही निवेश करें.

उन्होंने ये भी कहा कि अगर कुछ निवेशकों की रेटिंग गिर जाए तो उनमें किया गया निवेश बेंच दें. इसकी वजह से जिन कंपनियों या देशों की रेटिंग नीचे गिरती हैं उनके लिए बहुत बड़ी दिक्क़त खड़ी हो जाती है.

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Image caption अमरीका ने अपनी नई गिरी हुई क्रेडिट रेटिंग को चुनौती दी है

बड़ी निवेश कम्पनियां जब रेटिंग कम होने पर अपने निवेशों को बड़े पैमाने पर निकालना या बेचना शुरू करती हैं तो उनके बॉंड की क़ीमत बाज़ार में और ज़्यादा गिर जाती है और उनको मिलने वाले क़र्ज़ पर ब्याज और ज़्यादा बढ़ जाता है.

यूँ तो सिक्योरिटीज़ ऐंड एक्सचेंज कमीशन की लिस्ट में क़रीब 10 क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को मान्यता मिली हुई है जिसमे एक कनाडाई और दो जापानी कम्पनियां शामिल हैं लेकिन स्टैण्डर्ड एंड पूअर, मूडीज़ और फ़िच बाकि़यों से कहीं ऊपर हैं.

रेटिंग एजेंसियों की कार्यपद्धति पर सवाल

स्टैण्डर्ड और पूअर कहती है कि यूं तो इसकी रेटिंग उधार लेने वालों के वित्तीय हालत और बाज़ार की हालत जैसे कई विस्तृत पैमानों पर आधारित रहती है लेकिन कुछ चीज़ें और भी हैं जो परिणामों को प्रभावित कर सकतीं हैं.

'उन चीज़ों' में आर्थिक नीतियाँ, वैश्विक राजनीति और प्रबंधन नीतियां शामिल हैं.

साल 2007 में खड़े हुए वैश्विक आर्थिक संकंट के दौरान इन रेटिंग एजेंसियों की बहुत निंदा हुई. दिवालिया हुई कई कम्पनियां और अर्थव्यवस्थाएं वो थीं जिनका क्रेडिट मूल्यांकन बहुत अच्छा था.

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