बाज़ारों का डर हटाने के लिए जी-7 कॉन्फ्रेंस

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यूरोप की अर्थव्यवस्थाओं में मची खलबली के बीच और अमरीका की क्रेडिट रेटिंग में आई गिरावट से सकते में आये जी-7 मुल्कों के वित्त प्रमुख आपस में इस मसले पर रविवार को चर्चा करने वाले हैं.

दूसरी तरफ़ यूरोपीयन सेन्ट्रल बैंक भी रविवार को एक आपात बैठक कर के यह फ़ैसला लेने वाला है कि क्या इसे इटली के द्वारा जारी क़र्ज़ के बौंड ख़रीदने चाहिए. यूरोप की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इटली इस समय यूरोज़ोन में फैले आर्थिक संकट से ग्रसित सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.

बीबीसी के व्यापार मामलों के सम्पादक रॉबर्ट पेस्टन का कहना है कि यूरोपीयन सेन्ट्रल बैंक का फ़ैसला बहुत ही महत्त्व रखता है. बैंक की गवर्निंग काउन्सिल इस समय इस मसले पर बंटी हुई है.

डर ख़त्म करने की कोशिश

यूरो ज़ोन में मची हलचल से दुनिया भर के बाज़ार पहले ही परेशान थे कि अमरीका की क्रेडिट रेटिंग गिरने से उनकी चिंताएं और गहरा गईं. जानकारों का कहना है कि जी-7 में शामिल दुनिया के सात सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्री इस समय सबसे पहले दुनिया के बाज़ारों में फैली आशंकाओं को सोमवार सुबह को बाज़ार खुलने के पहले शांत करने की कोशिश करेगें.

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्टैण्डर्ड एंड पूअर्स ने शुक्रवार को अमरीका की क्रेडिट रेटिंग इतिहास में पहली बार उच्चतम एएए से गिरा कर एए + कर दी थी.

इस सबके बीच पूरी दुनिया में अफवाहें आम हैं की यूरो ज़ोन की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं क़र्ज़ के संकट में फंस सकतीं हैं.

समाचार एजेंसी एएफ़पी ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि जी-7 मुल्कों - अमरीका, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान, फ़्रांस, कनाडा और इटली के वित्तमंत्री एक टेलीफ़ोन कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं.

जापान सारकार के अधिकारियों ने ज़्यादा कुछ तो नहीं कहा पर पूछने पर महज़ इतना बोले कि " ऐसा समझना सामन्य होगा" की जी-7 के वित्तमत्री मौजूदा हालत में आपस में बात करें.

यूरोप के नेता जुटे

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Image caption ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सार्कोज़ी से आधा घंटे फ़ोन पर बात की है

शनिवार को इटली में छुट्टी मना रहे ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी से आधा घंटे फ़ोन पर बात की है.

पिछले सप्ताह यूरोपीयन कमीशन के अध्यक्ष ने कहा था की यूरोप में ज़िम्मेदार लोग क़र्ज़ संकट को फैलने से नहीं रोक पा रहे हैं. इसके बाद लोग अंदेशे में आ गए थे कि ये ग्रीस को पहले ही निगल चुकी है और क़र्ज़ संकट स्पेन और इटली तक पहुँच सकता है.

इटली और स्पेन दोनों ही इस बात का दावा कर रहे हैं कि वो अपने क़र्ज़ों का भुगतान सही समय पर करने में सक्षम हैं.

बावजूद इसके जर्मनी के बॉंड - जो कि यूरोप में सबसे सुरक्षित समझे जाते हैं - उनके और स्पेन और इटली के बॉंडों के बीच में अंतर बहुत बढ़ गया है.

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