नहीं काम आया ओबामा का भरोसा

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Image caption अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का दिलाया भरोसा भी बाज़ार में विश्वास नहीं लौटा सका

निवेशकों को भरोसा दिलाने की अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की तमाम कोशिशों के बावजूद दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में गिरावट जारी रही.

रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स ने अमरीका की रेटिंग एएए यानी ट्रिपल ए से गिराकर एए+ कर दी थी. इसके बाद पहले सार्वजनिक बयान में राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि बाज़ार ने अब भी अमरीका को सबसे ऊपर की रेटिंग दे रखी है.

मगर उनके बयान के बावजूद वॉल स्ट्रीट का शेयर सूचकांक डाओ जोन्स 5.6 प्रतिशत तक गिर गया. राष्ट्रपति ओबामा के भाषण से पहले तक डाओ जोन्स सिर्फ़ ढाई प्रतिशत ही नीचे गिरा था.

अंकों के हिसाब से डाओ जोन्स में 635 अंकों की गिरावट रही और वो 10,810 पर बंद हुआ. एक दिन में इतनी बड़ी गिरावट अक्तूबर 2008 के बाद से पहली बार हुई है.

इससे पहले ब्रिटेन का फ़ुटसी शेयर सूचकांक 3.4 प्रतिशत की गिरावट पर बंद हुआ.

यानी ब्रिटेन का मुख्य शेयर सूचकांक 178 अंक गिरा. उधर जर्मनी का शेयर बाज़ार पाँच प्रतिशत और फ़्रांस का 4.7 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ.

विश्लेषकों का मानना है कि अमरीका और कुछ यूरोपीय देशों में बचत के और क़दम उठाने होंगे मगर उससे पहले से ही कमज़ोर चल रही आर्थिक बहाली सही रास्ते से भटक सकती है.

जेनेराली इंवेस्टमेंट्स के मुख्य अर्थशास्त्री क्लॉस वीनर ने कहा, "लोग इसलिए घबराहट में बिकवाली कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अमरीका के फिर से मंदी में चले जाने का डर है."

ये डर सोने और तेल की क़ीमतों में भी दिखा है.

ओबामा का भरोसा

सोने की क़ीमतें जहाँ लगातार चढ़ती ही जा रही हैं वहीं तेल की क़ीमतें गिर रही हैं क्योंकि लोगों को डर है कि दुनिया भर में आर्थिक वृद्धि की दर कम होने पर तेल की माँग भी कम हो जाएगी.

रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स की ओर से अमरीका की रेटिंग कम किए जाने के बारे में राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, "बाज़ार चढ़ेंगे और गिरेंगे. मगर ये अमरीका है. कोई एजेंसी कुछ भी कहे हम हमेशा से ट्रिपल ए रेटिंग के देश थे और हमेशा ही रहेंगे."

ओबामा ने उम्मीद ज़ाहिर की कि अमरीका की रेटिंग घटाए जाने के बाद अमरीकी नेता स्थिति की गंभीरता को समझेंगे. उन्होंने अपनी डेमोक्रेटिक पार्टी और विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों से अपील की कि वे अमरीकी घाटे और ऋण के मसले पर राजनीति न करें.

उनका कहना था, "समस्या नीति या योजनाओं के स्तर पर नहीं है. दरअसल वॉशिंगटन में राजनीतिक इच्छाशक्ति ही नहीं है."

ओबामा ने बताया कि अब वह एक नई योजना सामने रखेंगे जिसमें ज़्यादा कमाई वालों के लिए ज़्यादा टैक्स होगा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर ख़र्च में कटौती होगी.

भारतीय शेयर बाज़ार

दुनिया भर की इस उथल-पुथल का असर भारतीय शेयर बाज़ार पर भी पड़ा. सोमवार को बाज़ार में काफ़ी हलचल रही और फिर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक 315 अंक नीचे गिरकर 16990 अंकों पर बंद हुआ.

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ़्टी भी 92 अंक नीचे गिरकर 5118 पर बंद हुआ. एशियाई बाज़ारों में हुई नकारात्मक शुरुआत का असर भारतीय शेयर बाज़ारों पर भी पड़ा.

एक समय तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 500 से ज़्यादा अंक नीचे गिर गया. लेकिन यूरोपीय बाज़ारों की सकारात्मक शुरुआत के बाद सेंसेक्स में उछाल आया और सूचकांक एक बार फिर 17000 के पार चला गया.

यूरोप बेहाल

यूरोप में यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने इटली और स्पेन में सरकारी बॉन्ड ख़रीदने में लाखों यूरो ख़र्च किए हैं. इसका असर इटली और स्पेन में देखने को तो मिला, लेकिन बाक़ी के यूरोपीय देशों में गिरावट का दौर जारी रहा.

जी-7 के देशों और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की ओर से मिले आश्वासन के बाद यूरोपीय बाज़ारों में शुरुआत में कुछ स्थिरता देखी गई लेकिन कुछ समय बाद फिर गिरावट आई.

इससे पहले एशिया में जापान और दक्षिण कोरिया में शेयर बाज़ारों में 2.2 फ़ीसदी की गिरावट आई. हांगकांग का हांगसेंग 3.8 फ़ीसदी गिर गया.

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