अमरीका नहीं बढ़ाएगा ब्याज दर

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Image caption अमरीका का डाओ जोन्स गिरावट के साथ खुला मगर चार प्रतिशत ऊपर बंद हुआ

अमरीका के केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व ने संभावना जताई है कि ब्याज दरों को कम से कम साल 2013 के मध्य तक मौजूदा निचले स्तर पर ही रखा जाएगा.

उधर अमरीका और यूरोप के शेयर बाज़ारों में मंगलवार को सुधार हुआ. दोनों ही जगहों पर कमज़ोर आर्थिक विकास और ऊँचे राष्ट्रीय कर्ज़ की चिंताओं के बीच ब्रिटेन के फ़ुटसी सूचकांक में 1.9 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली तो फ़्रांसीसी शेयर बाज़ार भी 1.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ.

अमरीका का मुख्य शेयर सूचकांक डाओ जोन्स भी चार प्रतिशत ऊपर बंद हुआ है.

अमरीकी केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व ने है माना कि इस साल अमरीका का आर्थिक विकास उम्मीद से कहीं धीमा रहा है.

वैसे बैंक की ओर से अभी ये नहीं बताया गया है कि अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने के लिए उसमें और पैसा डालने की नीति पर विचार हो रहा है या नहीं.

कुछ विश्लेषकों को उम्मीद थी कि फ़ेडरल रिज़र्व ऐसा कर सकता है.

ब्याजदर

बैंक की ओपन पॉलिसी समिति की वॉशिंगटन में हुई बैठक के बाद ये बयान जारी किया गया. इसके बाद डाओ जोन्स तुरंत आधा प्रतिशत नीचे गिर गया.

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Image caption दुनिया भर के बाज़ारों में काफ़ी हद तक सुधार देखा गया है

मगर फिर धीरे-धीरे बाज़ार ने करवट ली और सुधार के बाद चार प्रतिशत ऊपर बंद हुआ.

बैंकरेट डॉट कॉम के अर्थशास्त्री ग्रेग मैकब्राइड का कहना है, "फ़ेडरल रिज़र्व ने जो भी कहा है उसमें निश्चित तौर पर बड़ी आर्थिक चिंता छिपी हुई है."

अमरीका में ब्याजदर दिसंबर 2008 के बाद से ही शून्य से 0.25 प्रतिशत के बीच बनी हुई है.

अमरीका में बेरोज़ग़ारी की दर लगातार नौ प्रतिशत से ऊपर ही है और फ़ेडरल रिज़र्व ने इस बयान में चेतावनी भी दी कि श्रम बाज़ार में पिछले कुछ महीनों में हालात बिगड़े ही हैं.

उसने कहा है कि अब महंगाई कुछ कम हुई है क्योंकि ऊर्जा और आवश्यक वस्तुओं की क़ीमतें जो ऊंचाई पर थीं अब कुछ नीचे आई हैं.

एशियाई बाज़ार

मंगलवार को एशियाई शेयर बाज़ारों में और गिरावट देखी गई मगर व्यापार बंद होते-होते उन्होंने काफ़ी हद तक घाटे की भरपाई करनी शुरू कर दी थी.

जापान का निकेई सूचकांक 1.7 प्रतिशत नीचे बंद हुआ तो दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.64 प्रतिशत नीचे. हॉन्ग कॉन्ग का हान्ग सेंग 2.8 प्रतिशत नीचे रहा.

कच्चे तेल की क़ीमतें लगातार गिर रही हैं क्योंकि आर्थिक मंदी के बीच ये चिंता बनी हुई है कि आने वाले महीनों में तेल की माँग घट सकती है.

भारत के शेयर बाज़ार में भी गिरावट का दौर जारी रहा. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ़्टी में लगातार दूसरे दिन गिरावट जारी रही.

मंगलवार को जैसे ही मुंबई शेयर बाज़ार का कारोबार शुरु हुआ बीएसई एक बार तो 417 अंक नीचे गिर गया. लेकिन बाद में उसमें कुछ सुधार आया. आख़िरकार बीएसई का सेंसेक्स 132 अंकों की गिरावट के साथ 16858 पर बंद हुआ.

जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ़्टी 48 अंक नीचे गिरकर 5069 पर बंद हुआ.

सोमवार को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भरोसा दिलाने के प्रयासों के बावजूद डाओ जोन्स सूचकांक में 5.6 प्रतिशत और नैसडैक में 6.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी.

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