‘यूरोज़ोन का हिस्सा बना रहेगा ग्रीस’

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Image caption फ्रांस, जर्मनी और ग्रीस की ओर से यह घोषणा बाज़ारों में स्थिरता लाने के नज़रिए से की गई है.

फ्रांस और जर्मनी के नेताओं ने कहा है कि ग्रीस यूरोज़ोन का हिस्सा बना रहेगा साथ ही ग्रीस के प्रधानमंत्री ज्यॉर्ज पापेंद्रू ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि ग्रीस कर्ज़ की शर्त के रुप में खर्चों में कटौतियों के अपने वादे पर खरा उतरेगा.

ग़ौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठनों और बाज़ारों में इस बात को लेकर आशंका बढ़ रही है कि ग्रीस अपना कर्ज़ चुकाने में नाकाम रहेगा.

फ्रांस, जर्मनी और ग्रीस के नेताओं की ओर से की गई यह घोषणा इन आशंकाओं के चलते बाज़ारों में मची उथल-पुथल पर रोकथाम के नज़रिए से की गई है.

बीबीसी के वाणिज्य संवाददाता एंड्रयू वॉकर के मुताबिक ग्रीस, जर्मनी और फ्रांस के नेताओं ने फ़ोन पर वार्ता के ज़रिए यूरोप में बढ़ रहे आर्थिक संकट के बारे में विचार-विमर्श किया.

इन नेताओं की इस बात पर सहमति बनी कि ग्रीस यूरोज़ोन में बना रहेगा और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर से लागू आर्थिक सुधारों पर अमल करेगा.

यूरोज़ोन गुट के प्रमुख ज़्यां क्लोद युंकर पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि ग्रीस का क़र्ज़ संकट अपने साथ यूरोज़ोन के कम से कम पाँच और देशों को ले डूबेगा.

‘यूरोबॉंड्स’ का प्रस्ताव

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक इस वार्ता के ज़रिए फ्रांस और जर्मनी ने ग्रीस की ओर से यूरोज़ोन को होने वाले नुकसान की आशंकाओं को लेकर बातचीत की और निवेशकों को आश्वस्त करने की पहल की है.

ग्रीस के संकट को लेकर फ़्रांस और जर्मनी के चिंतित होने का कारण ये है कि ग्रीस के कर्ज़ संकट से सबसे अधिक फ़्रांस और जर्मनी के बैंक जुड़े हुए हैं.

ग्रीस के कर्ज़ अदा ना कर पाने की सूरत में ये बैंक मुश्किल में पड़ जाएँगे.

इससे पहले यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जोस मैन्यूअल बारोसो ने कहा था कि आयोग ‘यूरोबॉंड्स’ के ज़रिए इस आर्थिक संकट का हल निकालने की कोशिश करेगा.

यूरोज़ोन की सरकारें मिलकर इन ‘यूरोबॉंड्स’ को खरीद पाएंगी. इससे आर्थिक संकट और कर्ज़ की मार से जूझ रहे देशों पर ब्याज का बोझ कम होगा और वो इस संकट से बाहर निकल पाएंगे.

लेकिन यूरोपीय आयोग का यह प्रस्ताव जर्मनी जैसे देशों को स्वीकार्य नहीं जिन्हें ज़्यादा ब्याज दर चुकानी पड़ेगी.

हालांकि यूरोपीय आयोग की ओर से रखे गए ‘यूरोबॉंड्स’ के प्रस्ताव और ग्रीस के यूरोज़ोन में बने रहने के आश्वासन का यूरोपीय बाज़ारों पर सकारात्मक असर हुआ है.

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