ब्रिक्स देश आईएमएफ़ को देंगे धन

ब्रिक्स देशों की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption ब्रिक्स देशों ने खुलकर यूरोपीय देशों की मदद पर कुछ नहीं कहा

ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका के संगठन ब्रिक्स ने कहा है कि वित्तीय संकट से निबटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को और सक्षम बनाने के उद्देश्य से वे उसे धन दे सकते हैं.

दुनिया के इन प्रमुख पाँच विकासशील देशों से वैसे संकट में घिरे यूरोपीय देशों को सीधी मदद की भी उम्मीद थी मगर इन देशों ने सीधे तौर पर उनकी मदद का कोई वादा नहीं किया.

इन देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक वॉशिंगटन में आईएमएफ़ की बैठक के मौक़े पर हुई. इन वित्त मंत्रियों ने दुनिया के प्रमुख 20 देशों के समूह जी-20 का आह्वान किया कि वे यूरो मुद्रा वाले देशों के ऋण संकट का सामना करने के लिए तुरंत और निर्णायक क़दम उठाएँ.

वित्त मंत्रियों का कहना था कि ये क़दम वैसे ही उठाए जाने चाहिए जैसे 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान एकजुट होकर क़दम उठाए गए थे.

मंत्रियों ने कहा कि विकासशील और विकसित देशों के समूह जी-20 का मंच इस बारे में चर्चा के लिए सही मंच है और उसे ज़्यादा मज़बूत करने की ज़रूरत है.

इन देशों की ये माँग विकसित देशों में आर्थिक संकट की बिगड़ती स्थिति पर विकासशील देशों की चिंता दिखाती है.

इसके साथ ही दोनों तरह के देशों की मौजूदा आर्थिक स्थिति का भी इसी बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि अब विकासशील देश उन देशों को आर्थिक संकट से निबटने के लिए वित्तीय मदद दे रहे हैं.

जल्दी उठाए जाएँ क़दम

इस मौक़े पर ब्राज़ील के वित्त मंत्री गिडो मान्टेगा ने चेतावनी दी कि अगर यूरो मुद्रा वाले देशों के ऋण संकट का सामना करने के लिए तुरंत क़दम नहीं उठाए गए तो विकासशील देश भी वित्तीय संकट का शिकार हो जाएँगे.

मान्टेगा ने कहा, "इस बात का काफ़ी ख़तरा है कि कुछ देशों का ऋण संकट एक अन्य वित्तीय संकट में तब्दील हो जाए. हमने 2008 के आर्थिक संकट में तेज़ी से और मिलकर क़दम उठाए थे. हमें फिर ऐसा करना होगा."

अभी ये स्पष्ट नहीं है कि ब्रिक्स के देश आईएमएफ़ जैसे संगठन को कैसे और कितना धन मुहैया कराएँगे.

इधर भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा, "हमारे देश में भी ग़रीबी कम करने के लिए संसाधनों की ज़बरदस्त माँग है. ऐसे में जैसे ही एक संस्था को वैश्विक स्तर पर स्थिरता लाने के लिए धन दिया जाएगा तो हमारे देश में अपनी आकाँक्षाएँ पूरी करने को लेकर काफ़ी तनाव हो जाएगा."

पिछले कुछ दिनों में ब्राज़ीलियाई अधिकारियों की ओर से ऐसे संकेत आ रहे थे कि वे संकटग्रस्त यूरोपीय देशों को सीधे वित्तीय मदद दे सकते हैं मगर इस बारे में तो बैठक में चर्चा भी नहीं हुई.

अब आईएमएफ़ को अगर ये देश आर्थिक मदद देते हैं तो वो बिना किसी शर्तों के तो नहीं होगी. हो सकता है ऐसे में ब्रिक्स देश इस मौक़े का फ़ायदा आईएमएफ़ में अपने मतदान की ताक़त को बढ़ाने में करें.

सदस्य देशों के कोटा की अगली समीक्षा जनवरी 2014 में होनी है.

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