उलटफेर के बाद यूरोपीय शेयर बाज़ार स्थिर

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Image caption यूरोपीय शेयर बाज़ारों पर जी-20 देशों की घोषणा का अनुकूल असर दिखाई पड़ा है.

गुरूवार को आई ज़बरदस्त गिरावट के बाद शुक्रवार को यूरोपीय शेयर बाज़ार में बेहतर कारोबार हुआ है.

ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी के सूचकांक 0.5 % से लेकर 1% तक की बढ़ोत्तरी पर कारोबार कर रहे थे.

इस ठहराव की वजह संयुक्त राष्ट्र की बैठक के लिए एकत्रित हुए जी-20 देशों के नेताओं का विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के नीति निर्धारकों से और क़दम उठाने की अपील बताई जा रही है.

बुधवार रात अमरीका के सेंट्रल बैंक फेडरल रिज़र्व ने अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए 'ऑपरेशन ट्विस्ट' का ऐलान किया था.

इसके तहत फेडरल रिज़र्व की योजना जून 2012 तक 40,000 करोड़ डॉलर के लंबी अवधि के बॉन्ड ख़रीदने की है.

हालांकि इस घोषणा के अगले दिन दुनिया भर के बाजारों में कारोबार घटा था और अमरीकी बाज़ार भी गिरे थे.

लेकिन जहाँ यूरोपीय शेयर बाजारों पर इस घोषणा का अनुकूल असर दिखाई पड़ा वहीं एशियाई शेयर बाज़ारों में एक बार फिर भारी बिकवाली का दौर दिख रहा है और कई देशों के सूचकांक नीचे की ओर गए.

भारतीय शेयर बाज़ार

दुनिया भर में मंदी की आशंका के बीच भारतीय शेयर बाज़ार के लुढ़कने का सिलसिला जारी है.

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने कारोबार की शुरुआत करते ही 1.2 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की.

बीएसई का सेंसेक्स शुक्रवार को 180 अंक की गिरावट के साथ ही खुला जो दोपहर तक 1.31 फ़ीसदी गिरकर 16,147.19 के स्तर पर पहुंच गया था.

गिरावट की मुख्य वजह स्टरलाइट इंडस्ट्री लिमिटेड, टाटा मोटर्स, आरआईएल और एचडीऍफ़सी बैंक के शेयरों का लुढ़कना था.

जबकि दूसरी तरफ़ एनएसई इंडेक्स एक फ़ीसदी गिरकर 4,859.45 के स्तर पर था.

इस बीच, अमरीकी डॉलर के मुक़ाबले रुपए की क़ीमत में गिरावट का सिलसिला जारी है.

शुक्रवार को बाज़ार खुलते ही रुपये की कीमत 49.65 थी जो भारतीय मुद्रा का पिछले 28 महीने का न्यूनतम स्तर है.

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