एशियाई शेयर बाज़ारों में फिर गिरावट

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Image caption एशियाई शेयर बाज़ारों में गुरुवार को भी गिरावट दर्ज की गई थी

यूरोपीय और अमरीकी बाज़ारों में गिरावट के बाद शुक्रवार को एशियाई शेयर बाज़ारों में एक बार फिर भारी बिकवाली का दौर दिख रहा है और सूचकांक नीचे जा रहे हैं.

दक्षिण कोरिया के मुख्य सूचकांक कोस्पी में 3.6 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया के एएसएक्स में 0.8 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है.

जापान का शेयर बाज़ार छुट्टी की वजह से बंद है.

गिरावट का ये दौर अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक की ओर से वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर टिप्पणी के बाद शुरु हुआ है.

विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट ज़ोएलिक ने कहा है कि विश्व एक ख़तरनाक दौर से गुज़र रहा है. उन्होंने सलाह दी है कि अमीर देशों के इससे निपटने के लिए तुरंत क़दम उठाने चाहिए वरना उनकी समस्या विकासशील देशों तक भी पहुँच जाएगी.

जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष की प्रमुख क्रिस्टीन लगार्दे ने विकासशील देशों से वैश्विक विकास के लिए और क़दम उठाने की अपील की है.

गिरावट

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Image caption अमरीकी केंद्रीय बैंक ने कहा है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था को सुधरने में अभी कई वर्ष लग सकते हैं

यूरोप और अमरीकी बाज़ारों में हुई भारी बिकवाली के बाद शुक्रवार को एशियाई शेयर बाज़ार गिरावट के साथ खुले हैं.

दक्षिण कोरिया के मुख्य सूचकांक कोस्पी में 3.6 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया के एएसएक्स में 0.8 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है.

जापान का शेयर बाज़ार छुट्टी की वजह से बंद है.

इससे पहले यूरोप के प्रमुख शेयरों में पाँच प्रतिशत तक की गिरावट आई थी.

फिर अमरीकी शेयर बाज़ार में गिरावट का दौर शुरु हुआ तो डाउ जोन्स 3.51 प्रतिशत और नास्डैक 3.25 प्रतिशत गिरावट के साथ बंद हुआ.

इससे पहले अमरीकी केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व की ओर से अमरीकी अर्थव्यवस्था को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर बाज़ार में गिरावट शुरु हुई थी जिसका असर गुरुवार को एशियाई बाज़ार पर दिखा था.

भारत में भी भारी बिकवाली के बीच शेयर बाज़ार 700 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ था.

चिंता

संयुक्त राष्ट्र की बैठक के लिए एकत्रित हुए जी-20 देशों के नेताओं ने विश्वबैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष से मुलाक़ात की है और नीति निर्धारकों से और क़दम उठाने की अपील की है.

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इंडोनेशिया, ब्रिटेन, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ़्रीका ने फ़्रांस को लिखे एक खुले पत्र में कहा है, "यूरोज़ोन की सरकारों को यूरो संकट से निपटने के लिए तुरंत क़दम उठाने चाहिए. सभी यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं को कर्ज़ की समस्या से निपटना चाहिए जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी हो रहा है."

इस समय फ़्रांस जी-20 का नेतत्व कर रहा है.

इससे अलावा ब्रिक्स देश, ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका ने कहा है कि वे वैश्विक आर्थिक मंदी से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और दूसरी वित्तीय संस्थाओं को आर्थिक मदद मुहैया करवा सकते हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि राजनीतिक स्तर पर और नीति के स्तर पर लिए जाने वाले फ़ैसलों का असर बाज़ार पर दिखेगा.

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