हाई कोर्ट ने टाटा की याचिका ठुकराई

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सिंगूर ज़मीन के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने टाटा मोटर्स की याचिका को नामंज़ूर कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि कुछ महीने पहले पारित हुआ सिंगूर भूमि पुनर्वास और विकास विधेयक संवैधानिक और वैध है.

इस विधेयक के तहत सिंगूर में टाटा के साथ हुए समझौते को रद्द करते हुए ज़मीन किसानों को वापस दी जानी है. लेकिन टाटा ने अदालत ने इसके ख़िलाफ़ कोर्ट का दरवाज़ खटखटाया था.

लेकिन अब कोलकाता हाई कोर्ट ने टाटा की याचिका ठुकरा दी है. कोर्ट के मुताबिक अगर कुछ नुकसान हुआ है तो टाटा मुआवज़े की माँग कर सकती है. सिंगूर फ़ैक्ट्री से अपना सामान हटाने के लिए टाटा को दो महीने का समय दिया गया है.

जज ने कहा है कि एक महीने तक ये फ़ैसला स्थगित रहेगा. इस दौरान दोनों पक्ष ऊपरी अदालत में अपील कर सकते हैं.

टाटा मोटर्स ने कहा है कि वे फ़ैसले का अध्ययन कर अपनी प्रतिक्रिया देगी.

विवाद

पश्चिम बंगाल में पिछली वाममोर्चे सरकार के कार्यकाल में टाटा समूह के साथ समझौता हुआ था जिसके तहत टाटा को सिंगूर में अपना संयंत्र लगाना था और उसके लिए उसे भूमि आवंटित की गई थी.

पश्चिम बंगाल सरकार ने एक हज़ार एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण करके उसे टाटा मोर्टस को सौंप था जहाँ वो टाटा का उत्पादन करने वाली थी. सिंगूर में टाटा मोटर्स का काम जनवरी 2007 में शुरु हुआ था

लेकिन भूमि आवंटन को लेकर टाटा समूह को लोगों का ज़बरदस्त विरोध झेलना पड़ा था. योजना का विरोध करने वालों का कहना था कि सिंगूर में चावल की बहुत अच्छी खेती होती है और वहाँ के किसानों को इस परियोजना की वजह से विस्थापित होना पड़ा है.इसे लेकर हिंसक प्रदर्शन भी हुए थे.

आख़िरकर 2008 में टाटा समूह ने सिंगूर स्थित अपने संयंत्र को पश्चिम बंगाल से हटाने का फ़ैसला किया था.

ममता बनर्जी ने 2011 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सिंगूर को एक बड़ा मुद्दा बनाया था.

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