ग्रीस नहीं पा सकेगा बजट घाटे का लक्ष्य

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Image caption ग्रीस में कटौती के सरकारी क़दमों का लोग काफ़ी विरोध कर रहे हैं

ग्रीस का कहना है कि 2011 और 2012 में उसका बजट घाटा कम तो होगा मगर फिर भी यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के तय लक्ष्यों तक नहीं पहुँच पाएगा.

इस साल बजट घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 8.5 प्रतिशत रहने की संभावना है जो पिछले साल के 10.5 प्रतिशत से तो कम है मगर 7.6 प्रतिशत के लक्ष्य से ज़्यादा है.

सरकार ने रविवार को 2012 के बजट का मसौदा पेश किया और उसमें जारी इन आँकड़ों के बाद सरकार ने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाने के लिए मंदी को ज़िम्मेदार ठहराया है.

एक तरफ़ ये आँकड़े आए हैं और दूसरी ओर आईएमएफ़, यूरोपीय संघ और यूरोपीय केंद्रीय बैंक के अधिकारी ग्रीस की राजधानी एथेंस पहुँचे हैं. वहाँ इन संगठनों के अधिकारी ये तय करेंगे कि ग्रीस को राहत पैकेज की किश्त दी जानी चाहिए या नहीं.

ग्रीस अगले महीने दिवालिया होने से बचने के लिए आठ अरब यूरो की सहायता चाहता है.

दिवालिया होने का असर

अगर ग्रीस दिवालिया हुआ तो इससे यूरो मुद्रा वाले कई देशों पर दबाव आ जाएगा, यूरोपीय बैंक के वित्त पर असर होगा और पूरी दुनिया धीरे-धीरे आर्थिक संकट में जा सकती है.

रविवार को ग्रीस के वित्त मंत्रालय ने कहा कि उसने जो कटौतियाँ की हैं वे ख़ासी अलोकप्रिय हो रही हैं पर अगर लक्ष्य तक पहुँचना है तो उसके बिना काम नहीं चल सकता.

उसने कहा, "ये साल समाप्त होने में अभी तीन अहम महीने बचे हैं. अब अगर सरकारी तंत्र और नागरिक सही ढंग से चलें तो साढ़े आठ प्रतिशत का लक्ष्य हासिल हो सकता है."

ग्रीस ने अगले साल के घाटे का अनुमान जीडीपी का 6.8 प्रतिशत रखा है और वह भी तय लक्ष्य साढ़े छह प्रतिशत से ज़्यादा है.

कैबिनेट की बैठक में ये भी फ़ैसला हुआ कि 30 हज़ार कर्मचारियों को इस साल के अंत तक 'श्रमिक रिज़र्व' में रखा जाएगा.

इसका मतलब होगा कि अभी उन्हें कटौती के साथ वेतन मिलागा और अगले साल उनकी नौकरी जा भी सकती है.

एक उपमंत्री ने समाचार एजेंसी रॉयटर को बताया कि ये फ़ैसला सर्वसम्मति से हुआ है.

माना जा रहा है कि ये सब क़दम यूरोपीय संघ, आईएमएफ़ और यूरोपीय केंद्रीय बैंक को रिझाने के लिए उठाए जा रहे हैं जिससे वे ग्रीस के लिए एक राहत पैकेज की घोषणा कर सकें.

इन तीनों संगठनों के अधिकारी जल्दी ही यूरोपीय संघ के वित्त मंत्रियों को रिपोर्ट सौंपेंगे मगर विश्लेषकों का कहना है कि उनके पास ग्रीस को पैकेज देने की सिफ़ारिश करने के अलावा कोई चारा भी नहीं है.

ग्रीस ने जो कटौतियों की घोषणा की है वे देश में काफ़ी अलोकप्रिय हुई हैं और उसकी वजह से हड़ताल और विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं.

कई देशवासियों का मानना है कि इन कटौतियों की वजह से देश की प्रगति की राह में बाधा पड़ रही है.

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