उद्योग क्षेत्र में मंदी, इन्फ़ोसिस को मुनाफ़ा

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Image caption विश्लेषकों का कहना है कि ताज़ा आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार हो रही गिरावट की पुष्टि करते हैं.

उद्योग क्षेत्र के ख़राब प्रदर्शन और खनन उत्पाद में आई कमी की वजह से भारत के औद्योगिकी क्षेत्र में अगस्त के महीने में 4.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि इसके बावजूद बाज़ार ने बुधवार को अच्छा प्रदर्शन किया है.

औद्योगिक उत्पादन क्षेत्र में आई इस गिरावट को आर्थिक मंदी का संकेत माना जा रहा है.

औद्योगिक उत्पाद के सूचकांक के आधार पर पिछले साल अगस्त में फ़ैक्ट्री उत्पाद में 4.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी.

इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से अगस्त तक औद्योगिक उत्पाद सूचकांक में 5.6 की ही बढ़त दर्ज की गई, जबकि पिछले साल इसी अंतराल में ये आंकड़ा 8.7 प्रतिशत था.

उधर खनन उत्पाद में अगस्त में 3.4 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि पिछले साल अगस्त में खनन उत्पाद में 5.9 प्रतिशत बढ़त दर्ज की गई थी.

विश्लेषकों का कहना है कि ताज़ा आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार हो रही गिरावट की पुष्टि करते हैं.

अप्रैल से जून की अवधि में भारत की अर्थव्यवस्था में केवल 7.7 प्रतिशत की बढ़त हुई, जो कि पिछली छह तिमाहियों में सबसे कम है.

इन्फ़ोसिस के मुनाफ़े में बढ़त

Image caption इस तिमाही में इन्फ़ोसिस को हुए फ़ायदे से निवेशक काफ़ी ख़ुश नज़र आ रहे हैं.

भारत की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ़्टवेयर कंपनी लिमिटिड की दूसरी तिमाही में 9.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है, जिसके बाद बुधवार को कंपनी के शेयर में भी पांच प्रतिशत बढ़त आई है.

गत 30 सितंबर को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी को कुल 1,906 करोड़ रुपए का मुनाफ़ा हुआ है.

उल्लेखनीय है कि इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में इन्फ़ोसिस का लाभ पिछली तिमाही के 1,818 करोड़ रुपए से घटकर 1,720 करोड़ रुपए पर आ गया था.

लेकिन इस तिमाही में कंपनी को हुए फ़ायदे से निवेशक काफ़ी ख़ुश नज़र आ रहे हैं.

पिछले दो महीनों में कंपनी के शेयर में पांच प्रतिशत की सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी देखी गई है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ यूरोप और अमरीका में जारी वित्तीय संकट का असर भारतीय तकनीक क्षेत्र पर भी हुआ है.

अमरीका और यूरोप की कंपनियां पैसा बचाने के लिए भारत जैसे देशों में अपने कार्यालय खोलते हैं, लेकिन वैश्विक मंदी के कारण इस चलन में कमी आई है.

बैंगलुरु की कंपनी इन्फ़ोसिस की आधे से ज़्यादा आमदनी अमरीका की कंपनियों से होती है, जबकि यूरोप इस लिहाज़ से दूसरे नंबर पर है.

एक वक्तव्य जारी कर इन्फ़ोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस डी शिभुलाल ने कहा, “वैश्विक वित्तीय वातावरण अभी भी अस्थिर है. ये भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए अब भी चिंता का विषय बना हुआ है.”

कहा जा रहा है कि इन्फ़ोसिस के मुनाफ़े में आई बढ़त का श्रेय रुपए के मूल्य में आई गिरावट को जाता है.

बुधवार को आकड़े आए लेकिन सेंसेक्स में दोपहर के समय 250 से अधिक अंकों की बढ़त देखी गई है.

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