मुद्रा स्फ़ीति दर में मामूली गिरावट

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Image caption रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज़ दरों को कई बार बढ़ाने के बावजूद खाद्य पदार्थों के दामों मे कोई कमी नही आई है.

भारतीय मुद्रा स्फ़ीति दर में हल्की गिरावट दर्ज की गई है. ताज़ा जारी किए गए आंकड़ो में थोक मूल्य सूचकांक मुद्रा स्फ़ीति दर अगस्त के 9.78 प्रतिशत से गिरकर 9.72 प्रतिशत पर आ पहुँचा है.

इस गिरावट के बाद भी मुद्रा स्फ़ीति दर चिंतित करने वाली है. पिछले क़रीब एक साल से मुद्रा स्फ़ीति नौ फ़ीसदी से ऊपर बरकरार है. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का कहना है कि महंगाई को कम करना उनके मंत्रालय की प्राथमिकता है.

महंगाई को रोकने के लिए केंद्रीय रिज़र्व बैंक ने पिछले डेढ़ साल में क़रीब एक दर्जन बार ब्याज़ दरों को बढ़ा दिया पर खाद्य और ईंधन की क़ीमतें कम नहीं हुई.

लगातार बढ़ती महंगाई से उपभोक्ताओं को रोज़ दो-चार होना पड़ रहा है, जबकि लाखों लोग दाल, सब्ज़ियों जैसे बुनियादी खाद्य सामाग्रियों को जुटाने के लिए जूझ रहे है.

बढ़ोत्तरी

विशेषज्ञों का मानना है कि देश के ग्रामीण इलाक़ों मे कुछ खाद्य पदार्थों के दाम सरकारी आंकड़ों से 20 से 30 फ़ीसदी तक ज़्यादा हो सकती है. इन बढ़े हुए दामों का कारण आपूर्ती मे तेज़ी से आई कमी और आमदनी मे बढ़ोत्तरी मानी जा रही है.

केंद्रीय रिज़र्व बैंक ने अपनी आर्थिक नीतियों से मुद्रा स्फ़ीति पर काबू करने के लिए अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे हालात पैदा किए है. हाल ही में रिज़र्व बैंक ने यह भी कहा था कि महंगाई की समस्या से उबरने के लिए अल्पकालिक विकास को भी नज़रअंदाज़ किया जा सकता है.

रिज़र्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने इसी सप्ताह कहा था कि ब्याज़ दरों को कम नही किया जाएगा, जब तक महंगाई काबू में नही आ जाती.

भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन जब दुनिया की संपन्न अर्थव्यवस्थाएँ एक और मंदी के लिए तैयार हो रही हैं, उस वक्त भारत में महंगाई की घरेलू समस्या काफ़ी चिंतित करने वाली है.