महंगाई दर दोहरे अंक में, ब्याज़ दर बढ़ने की संभावना

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Image caption भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में महंगाई बढ़ रही है.

खाद्य पदार्थों की महंगाई दर कुछ समय तक कम रहने के बाद एक बार फिर दोहरे अंक में पहुंच गई है और यह आंकड़ा इस समय 10.60 प्रतिशत का है.

खाद्य पदार्थों की महंगाई दर तोक मूल्य सूचकांक के आधार पर तय होती है और आठ अक्तूबर को खत्म हुए हफ्ते में यह दर काफ़ी ऊंची पाई गई है.

प्रोटीन वाले पदार्थ मसलन दूध, सब्ज़ियों और फलों की क़ीमत एक बार फिर बढ़ गई है.

गुरुवार को सरकार ने जो आंकड़े जारी किए हैं उसके अनुसार सब्ज़ियों की क़ीमत में 17.59 की बढ़ोतरी हुई है जबकि फलों की क़ीमत में 12.39 प्रतिशत और दूध में 10.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज़ की गई है.

दालों की क़ीमत में 7.42 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज हुई है जबकि प्याज की कीमतों में गिरावट हुई है.

प्याज़ की क़ीमत में 11.27 प्रतिशत की कमी हुई है और गेहूं में 0.18 प्रतिशत की कमी हुई है.

गैर खाद्य पदार्थों मसलन रेशों, तिलहन और खनिजों क़ीमत में 8.51 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज़ की गई है. जबकि एक अक्तूबर वाले सप्ताह में यह 9.59 प्रतिशत थी.

इसी तरह ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में महंगाई 15.17 प्रतिशत पर है जबकि आउ अक्तूबर से पहले वाले हफ्ते में यह 15.10 पर थी.

खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमत से सरकार और रिज़र्व बैंक पर ज़बर्दस्त दबाव बढ़ने वाला है कि वो इस स्थिति से जल्द से जल्द निपटें.

मार्च 2010 से आरबीआई ने महंगाई पर काबू करने के लिए ब्याज़ दरों में 12 बार बढ़ोतरी की है जो कुल मिलाकर 350 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि है.

रिज़र्व बैंक 25 अक्तूबर को मौद्रिक नीति की दूसरी तिमाही समीक्षा जारी करने वाली है और माना जाता है कि इसमें फिर एक बार ब्याज़ दरों में बढ़ोतरी की जाएगी.

इससे पहले बुधवार को वित्त मंत्री प्रणब मुखर्ज़ी ने दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमत और आपूर्ति में बाधा का हवाला देते हुए कहा था कि भारत में भी महंगाई की दर बढ़ती रहेगी.

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