बचत खाते पर ब्याज नियंत्रण मुक्त

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Image caption आरबीआई महंगाई पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रही है.

रिज़र्व बैंक ने मौद्रिक नीति में समीक्षा की घोषणा करते हुए एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ा दी हैं और साथ ही बचत खाते पर ब्याज तय करने का अधिकार बैंकों को दे दिया है.

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि बैंक अब बचत खाते पर ब्याज दर अपने हिसाब से तय कर सकेंगे, लेकिन इसके लिए दो शर्तें रखी गई हैं. डिपाज़िट रेट तय करने का अधिकार बैंको को देना एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फै़सला माना जा रहा है.

बैंक ने कहा है कि हर बैंक को एक लाख रुपए तक निश्चित ब्याज दर सुनिश्चित करना होगा भले ही यह पैसा एक लाख से कम हो लेकिन ब्याज दर अलग-अलग नहीं हो सकती.

ब्याज दरों को बैंकों पर छोड़ने की दूसरी शर्त ये होगी कि अगर पैसा एक लाख से ऊपर हुआ तो बैंक ब्याज की अलग-अलग दरें रख सकता है लेकिन अलग-अलग ग्राहकों के लिए अलग दरें नहीं हो सकतीं.

एसोचैम ने इस कदम का स्वागत किया है लेकिन एसोचैम ने ब्याज दरें बढ़ाने की कड़ी आलोचना की है.

रेपो रेट में बढ़ोतरी

आरबीआई गवर्नर ने रेपो रेट और रिवर्स रेट की दरों में बढ़ोतरी की और साफ़ किया कि वृद्धि दर भी कम कर दी गई है.

गवर्नर डी सुब्बा राव ने बताया कि रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हुई जिसके साथ ही यह रेट 8.25 प्रतिशत से बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो जाएगी.

इसी तरह रिवर्स रेपो रेट को भी बढ़ाकर 7.25 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत कर दिया है.

हालांकि कैश रिज़र्व रेशियो को छह प्रतिशत ही रखा गया है लेकिन कहा गया है कि आर्थिक विकास दर का अनुमान आठ प्रतिशत से घटाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया गया है.

आरबीआई गवर्नर का कहना था, ‘‘ हमने मंहगाई को ध्यान में रखकर मौद्रिक नीति की समीक्षा की है. मंहगाई बढ़ रही है जिस पर नियंत्रण करना ज़रुरी है.’’

पिछले साल मार्च से अब तक 13 बार ब्याज़ दरें बढ़ाई जा चुकी हैं लेकिन महंगाई की दर रुकी नहीं है.

इन ब्याज दरों के बढ़ने के साथ ही घरों और गाड़ियों के लिए लिया जाने वाला ऋण और महंगा हो जाएगा.

सरकारी आकड़ों के अनुसार पिछले दस महीनों से महंगाई की दर नौ प्रतिशत से अधिक ही रही है लेकिन पिछले महीने यह दस प्रतिशत से ऊपर चली गई.

गवर्नर ने आरबीआई विकास दर के बारे में अपने अनुमान बताए और आकड़ों के आधार पर विकास दर के अनुमान को आठ प्रतिशत से घटाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया.

आरबीआई ने पिछले महीने ही रेपो रेट को बढ़ाकर 8.25 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट को 7.25 प्रतिशत किया था.

कड़ी प्रतिक्रिया

रेपो रेट बढ़ाए जाने पर हर तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया हुई है. न केवल एसोचैम बल्कि शेयर मार्केट के विशेषज्ञों ने भी इसकी आलोचना की है.

मुंबई के दलाल स्ट्रीट पर शेयर बाज़ारों के एक विशेषज्ञ ज़हीर अनवर कहते हैं, "रिज़र्व बैंक आफ इंडिया से इस बेवकूफी की उम्मीद नहीं थी. यह हमारे समुदाय की समझ से बाहर की बात है. पिछले 18 महीनों में सरकार ने 13बार ब्याज दर बढ़ाया है लेकिन क्या इस से महंगाई कम हुई है? सरकार को ग्रोथ की तरफ ध्यान देना चाहिए."

वो कहते हैं, "एक तरफ आप खर्च पर अंकुश लगाने के लिए ब्याज दर बढाते हैं तो दूसरी तरफ महंगाई भत्ता देते हैं. तो खर्च कहाँ से रुकेगा? उधर लोगों के पास काला धन इतना है कि खर्च रुकने का कोई सवाल ही नहीं. सरकार काला धन बटोरने की कोशिश करे तब खर्च कम होगा. डिमांड कम होगा. लेकिन सरकार करेगी कैसे? हर नेता, सरकारी अफसरों के पास काला धन है. अपने पैरों पर कोई कुल्हाड़ी नहीं मारता" शेयर दलाल राकेश जैन कहते हैं, "महंगाई बढती जा रही है. कंपनियों को घाटा होता जा रहा है लेकिन इस सरकार के पास ब्याज दर बढाने के इलावा और कोई रास्ता दिखाई नहीं देता. शेयर बाज़ारों में सेंटिमेंट बहुत खराब है. बीमारी का इलाज ग़लत हो रहा है. अगर आप कोई मामूली डाक्टर के पास भी कई बार जाएँ और अगर आप को फायदा नहीं हो रहा है तो वोह दवाई बदलना चाहेगा. मगर सरकार इस मामूली डाक्टर से भी बदतर है"

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