मारूति का मुनाफ़ा 60 फ़ीसदी घटा

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Image caption तेल कीमतों में बढ़ोत्तरी और ब्याज़ दर में इज़ाफ़े से घरेलू बाज़ार में गाड़ियों की माँग कम रही.

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुज़ुकी के मुनाफ़े में लगभग 60 फ़ीसदी की गिरावट आई है.

कंपनी ने 30 सितंबर को खत्म हुए चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं जिनसे पता चलता है कि उसका मुनाफ़ा आधे से भी अधिक घट गया है.

माना जा रहा है कि मानेसर में कंपनी के कारखाने में हुई मज़दूरों की हड़ताल, ब्याज़ दरों में वृद्धि और गाड़ियों की कीमतें बढ़ाए जाने के कारण उसके उत्पादों की माँग में गिरावट आई है.

इस बीच मारुति सुज़ुकी के निदेशक मंडल ने गुजरात के मेहसाना में कारखाना खोलने के लिए ज़मीन ख़रीदने की योजना को स्वीकृति दे दी है. यह हरियाणा के बाहर कंपनी का सबसे बड़ा कारखाना होगा.

गिरावट

वित्तीय वर्ष 2011-12 की दूसरी तिमाही में कंपनी का मुनाफ़ा दो अरब 40 करोड़ रूपए रहा जो कि पिछले वित्तीय वर्ष के दूसरी तिमाही के मुनाफ़े से 59.8 फ़ीसदी कम है.

पिछले वर्ष इसी अवधि में मारूति ने पाँच अरब 98 करोड़ रूपए का मुनाफ़ा कमाया था.

Image caption मारूति सुज़ुकी के मुताबिक मानेसर में हुए हड़तालों से कंपनी की उत्पादन क्षमता पर गंभीर असर पड़ा

मारुति सुज़ुकी की ओर से जारी किए गए एक वक्तव्य के मुताबिक दूसरी तिमाही में कंपनी की बिकी गाड़ियों की संख्या में 19.56 प्रतिशत की गिरावट आई.

इस अवधि में मारूति सुज़ुकी की 2,52,307 गाड़ियाँ बिकी जबकि पिछले वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी ने 3,13,654 गाड़ियाँ बेची थीं.

कंपनी के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में तेल कीमतों में बढ़ोत्तरी और ब्याज़ दर में वृद्धि से घरेलू बाज़ार में गाड़ियों की माँग कम रही.

कंपनी की तिमाही रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष मारूति के शेयरों के भाव 21 प्रतिशत नीचे चले गए है.

असंतोष

हरियाणा में मानेसर स्थित मारुति के कारखाने में पिछले जून महीने से असंतोष और हड़ताल के कारण उत्पादन और बिक्री पर गंभीर असर पड़ा.

कंपनी के इस कारखाने में श्रमिकों के निलंबन को लेकर कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच मतभेद गहरा गए थे.

इस मतभेद के कारण मज़दूरों ने 15 दिनो की हड़ताल की थी जो हरियाणा के मुख्यमंत्री की मध्यस्थता के बाद खत्म हो पाई.

मारूति प्रबंधन ने पिछले सप्ताह कहा कि उन्होंने मानेसर प्लांट के विवाद को सुलझा लिया है.

इससे पहले मारुति सुज़ुकी के इसी संयंत्र में करीब एक महीने तक हड़ताल चली थी.

वो हड़ताल काम करनेवाले अस्थायी मज़दूरों को स्थायी किए जाने की माँग को लेकर हुई थी.

मारूति-सुज़ुकी में 54.2 प्रतिशत हिस्सेदारी जापान के सुज़ुकी मोटर कॉर्पोरेशन की है.

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