भारतीय और चीनी उपभोक्ता एशिया में सबसे ज़्यादा आशान्वित

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Image caption बीबीसी सर्वे के मुताबिक एशिया में चीन और भारत अगले वर्ष के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर सबसे ज़्यादा आशान्वित हैं.

अगले वर्ष के लिए भारत और चीन अपनी अर्थव्यस्था के बारे में सबसे ज़्यादा आशावादी एशियाई देश के रूप में उभरे हैं.

ये बात बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के एक सर्वेक्षण में सामने आई है.

इसके मुताबिक पाकिस्तान में निराशावादी लोगों की संख्या आशावादी लोगों से ज़्यादा है.

सर्वेक्षण 25 देशों के उपभोक्ताओं का उनकी अर्थव्यवस्था में आत्मविश्वास नापने के लिए किया गया था.

ग्लोबस्कैन संस्था द्वारा इस वर्ष जुलाई और सितम्बर के बीच किए गए इस सर्वेक्षण में 25,438 लोग शामिल थे.

लोगों से पूछा गया था कि अगले वर्ष और आने वाले पांच वर्षों में उन्हें अपने देश में आर्थिक स्थिति के बारे में क्या उम्मीद है.

दुनिया के कई बड़े औद्योगिक देशों के उपभोक्ता अपने देश के आर्थिक संभावनाओं को लेकर काफ़ी निराशावादी था, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के उपभोक्ता कहीं ज़्यादा आशावादी थे.

व्यवसाय की अच्छी परिस्थितियां

एशियाई देशों में भारत और चीन सबसे ज़्यादा आशावादी पाए गए. सर्वेक्षण में शामिल यहां के आधे से ज़्यादा ( 51% ) लोग मानते हैं कि उनके देश में अगले साल व्यवसाय के लिए अच्छी परिस्थितियां रहेंगी.

हालांकि पिछले साल की तुलना में भारत में आर्थिक माहौल के बारे में आशावादी लोग कम हुए हैं, लेकिन चीन में ये आंकड़ा नहीं बदला. साथ ही भारत में चीन के मुक़ाबले दोगुने निराशावादी लोग हैं.

वहीं पाकिस्तान में अल्पकालिक आर्थिक संभावनाओं के बारे में लोगों का दृष्टिकोण बहुत अच्छा नहीं है. 30 फ़ीसदी सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले लोगों की तुलना में 36 फ़ीसदी लोगों का रवैया निराशावादी पाया गया.

दीर्घकालिक संभावनाओं के मामले में देखा गया कि सबसे ज़्यादा, 62 प्रतिशत, चीनी लोगों को अपनी अर्थव्यवस्था के बढ़िया प्रदर्शन पर विश्वास है.

भारत की बात करें तो हालांकि 2010 की तुलना आधे ही लोगों को अपनी अर्थव्यवस्था में विश्वास रहा लेकिन लंबे समय के लिए ज़्यादातर भारतीय अपने देश की आर्थिक संभावनाओं के बारे में आशान्वित हैं.

सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में ग्लोबस्कैन के रिसर्च डायरेक्टर सैम माउंटफ़ोर्ड का कहना था, "हालांकि भारत में आर्थिक दृष्टिकोण अब भी सकारात्मक है, लेकिन लगता है कि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) देशों की आर्थिक मंदी के असर का डर और बढ़ती मंहगाई के चलते भारतीय ज़्यादा चौकन्ने हो गए हैं. मगर चीनी लोगों को विश्वास है कि उनका देश आने वाले कुछ समय तक दुनिया की अर्थव्यवस्था को चालू रखेगा. "

ये तीसरा साल है जब इस सर्वेक्षण द्वारा दुनिया भर के उपभोक्ताओं का उनकी अर्थव्यवस्था में विश्वास मापा गया है.

इसके मुताबिक 2010 से अब तक विकासशील देशों के उपभोक्ताओं का अपने देश की अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज़्यादा विश्वास बढ़ा दिखाई दिया. इनमें सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी केन्या, मेक्सिको, तुर्की, इंडोनेशिया और जर्मनी में देखी गई.

लेकिन इसी दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया में बेहतर आर्थिक परिस्थितियों की उम्मीद करने वाले लोगों का अनुपात घटा जबकि ग्रेट ब्रिटेन, फ़्रांस, कनाडा, अमरीका और जापान जैसे जी 7 देशों के लोगों में अपनी अर्थव्यवस्था में विश्वास में कोई बदलाव नहीं देखा गया.

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