युआन को लेकर चीन की फिर आलोचना

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Image caption माना जा रहा है कि ओबामा की ओर से पहली बार चीन के लिए इतने कटु शब्दों का इस्तेमाल हुआ है

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी मुद्रा युआन का अवमूल्यन करके रखने के लिए फिर चीन की आलोचना की है.

हवाई में एशिया-प्रशांत देशों के क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा कि पिछले साल 'कुछ सुधार' तो हुआ है मगर वो काफ़ी नहीं था.

चीन को लेकर ओबामा का ये बयान अब तक का सबसे कड़ा बयान है.

आम तौर पर अमरीका सरकार इस तरह की बातें बंद दरवाज़े के पीछे करती रही है क्योंकि वह अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझीदार को नाराज़ नहीं करना चाहती.

मगर बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में ओबामा ने कहा कि कई अर्थशास्त्री ये मानते हैं कि युआन का 20 से 25 प्रतिशत तक अवमूल्यन किया गया है और इसकी वजह से अमरीका से चीन को निर्यात काफ़ी महँगा है जबकि आयात में चीन को फ़ायदा रहता है.

उन्होंने कहा कि चीन को उन्हीं नियमों के हिसाब से काम करना होगा जिन पर बाक़ी देश काम कर रहे हैं. ओबामा का कहना था कि चीन अक़सर अपने फ़ायदे के लिए 'तंत्र को बदल' लेता है.

चीन का जवाब

इससे पहले अपनी आर्थिक नीतियों का बचाव करते हुए चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने अमरीका से दो टूक शब्दों में कहा था कि अमरीका के व्यापार घाटे और बेरोज़गारी की वजह उसकी मुद्रा विनिमय नीति नहीं है.

हवाई में एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग संगठन (एपेक) की वार्षिक बैठक के दौरान दोनों नेताओं की मुलाक़ात हुई और वहाँ पर भी इस विषय में दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई.

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Image caption चीन की मुद्रा विनिमय नीति को लेकर अमरीका काफ़ी समय से शिकायत कर रहा है

चीन के व्यापार रिकॉर्ड को लेकर राष्ट्रपति ओबामा पर घरेलू राजनीति में बड़ा दबाव है.

चीन के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति ओबामा से हू जिंताओ ने दो टूक शब्दों में कहा कि अमरीका के व्यापार घाटे और बेरोज़गारी के लिए चीन की व्यापार नीतियाँ 'दोषी' नहीं हैं.

वेबसाइट के अनुसार उन्होंने कहा, "यदि युआन के मूल्य में स्थिरता के साथ बढ़ोत्तरी होती है तो भी वे समस्याएँ हल नहीं होंगी जिनका सामना अमरीका कर रहा है."

हू ने कहा, "वैश्विक मंदी से उबरने की दिशा में एक तरह की अस्थिरता और अनिश्चितता है और ऐसी स्थिति में ये ज़रूरी है कि चीन और अमरीका आपसी संवाद और सहयोग को बढ़ाएँ."

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