किंगफ़िशर को दूसरी तिमाही में 468 करोड़ का घाटा

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Image caption किंगफ़िशर भारतीय विमानन क्षेत्र की प्रमुख निजी कंपनी है

कर्ज़ संकट का सामना कर रहे किंगफ़िशर एयरलाइन को 30 सितंबर को समाप्त हुई तिमाही में 468.66 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ है.

कंपनी की ओर से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में दी गई सूचना के मुताबिक़ ईंधन की ऊंची क़ीमतों की वजह से कंपनी को ये नुक़सान उठाना पड़ा है.

पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को 230.81 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था. यानी एक साल में कंपनी का घाटा दोगुना हो गया है.

हालांकि इस तिमाही में ऑपरेशन्स से कंपनी की आय 10.5 फ़ीसदी बढ़कर 1,528.16 करोड़ रही है जो इसी अवधि में पिछले साल 1,382.72 करोड़ रुपए थी.

बैंकरों ने किंगफ़िशर के प्रोमोटरों को साफ़ शब्दों में कह दिया है कि अगर वो मौजूदा कर्ज़ की शर्तों में बदलाव चाहते हैं तो उन्हें कंपनी में 800 करोड़ रुपए का ताज़ा निवेश करना होगा.

बैंकों की चेतावनी

बैंकों ने कंपनी से कहा है कि मौजूदा हालात से उबरने के लिए वो कोई विश्वसनीय योजना पेश करे.

भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले 13 कर्ज़दाता बैंकों का समूह अभी भी इस पर विचार कर रहा है कि 7,057.08 करोड़ रुपए के कर्ज़ संकट का सामना कर रहे एयरलाइन को कैसे उबारा जाए.

बैंकों के प्रतिनिधि मंगलवार को किंगफ़िशर के प्रबंधन से मुलाक़ात करनेवाले हैं. किंगफ़िशर को साल 2010-2011 में 1,027 करोड़ का घाटा हुआ था और उसपर 7,000 करोड़ से ज़्यादा का कर्ज़ बक़ाया है.

आर्थिक संकट की वजह से पिछले कुछ हफ़्तों में एयरलाइन ने अपनी कई उड़ानें रद्द की हैं. भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि किंगफ़िशर को राहत पैकेज देने के तरीक़े ढूंढने होंगे. प्रधानमंत्री के बयान की विपक्षी पार्टियों और कुछ उद्योगपतियों ने कड़े शब्दों में निंदा की थी.

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