सरकार से आर्थिक सहायता नहीं मांगी: माल्या

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किंगफ़िशर एयरलाइन के चेयरमैन विजय माल्या ने कहा है कि उन्होंने कभी भी सरकार ने किसी आर्थिक सहायता की मांग नहीं की है.

विजय माल्या ने मुंबई में पत्रकारों को बताया, "हमने कभी भी करदाताओं के पैसे देने की मांग नहीं की है. ना तो हमने ऐसा किया है और ना ही हम ऐसा कभी करेंगे. हमने सिर्फ़ बैंको से और अतिरिक्त कार्यकारी पूंजी की मांग की है. हमने ऋण के पुनर्गठन की भी मांग नहीं की है."

भारी घाटा और नक़दी की कमी झेल रही विमान कंपनी किंगफ़िशर एयरलाइन को पिछले दिनों अपने कई उड़ानों में कटौती करनी पड़ी है. कंपनी को मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 468 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था.

माल्या ने कहा कि एयरलाइन की उड़ाने रद्द करने का फ़ैसला व्यावसायिक था.

किंगफ़िशर को दूसरी तिमाही में 468 करोड़ रुपए का घाटा

विजय माल्या ने कहा, “घाटे के रूटों पर उड़ाने रद्द करते समय भी हमने ग्राहकों के हित को ध्यान में रखा और उन्हीं शहरों के लिए उड़ाने रद्द कीं जहां कोई ना कोई अन्य एयरलाइन उड़ाने भरती है. हमने ये ज़िम्मेदारी के साथ किया है. ”

उन्होंने कहा कि घाटे के रूटों पर उड़ाने जारी रखा संभव नहीं है.

माल्या ने कहा कि भारत में एयरलाइन चलाना बहुत महंगा काम है. उन्होंने कहा कि भारत में ईंधन की क़ीमतें साल 2008 के बाद इस वक़्त सबसे अधिक हैं.

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद किंगफ़िशर ने इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम का सारा कर्ज़ा चुका दिया है. माल्या ने कहा हिंदुस्तान पेट्रोलियम का किंगफ़िशर पर छह सौ करोड़ का कर्ज़ा था लेकिन इस वक़्त ये सिर्फ़ 40 करोड़ बचा है.

विदेशी निवेश की अनुमति मिले

विजय माल्या ने कहा कि उड्डयन क्षेत्र में सीधे विदेशी निवेश के हिमायती हैं.

विजय माल्या ने कहा, “मैं एयरलाइन क्षेत्र में विदेशी निवेश का समर्थक हूं. एयरलाइन के व्यवसाय को एक एयरलाइन चलाने वाला नहीं समझेगा तो कौन समझेगा? मेरा मानना है कि भारतीय उड्डयन क्षेत्र में विदेशी एयरलाइनों को निवेश की अनुमति दी जानी चाहिए.”

उन्होंने कहा कि अगर एयरपोर्ट बनाने के लिए सौ प्रतिशत के विदेशी निवेश का इजाज़त है तो एयरलाइन के लिए क्यों नहीं.

उन्होंने कहा कि उड्डयन क्षेत्र में अधिक पूंजी की ज़रूरत होती है और इस पूंजी के लिए विदेशी एयरलाइनों को भारत में निवेश करने की अनुमति मिलनी चाहिए.

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