रुपए की कीमत में रिकॉर्ड गिरावट से मुश्किलें बढ़ीं

भारतीय मुद्रा रुपए के नोट और सिक्के
Image caption विश्लेषकों का मानना है कि महँगाई पर काबू पाना और मुश्किल हो जाएगा

अमरीकी डॉलर के मुकाबले में भारतीय रुपए में आई रिकॉर्ड गिरावट से महँगाई पर काबू पाने की सरकार की कोशिशों को झटका लगा है.

एक डॉलर के मुकाबले में रुपए की क़ीमत इस साल एक जनवरी में 44.67 रुपए से घटकर 22 नवबंर की सुबह तक 52.73 रुपए हो गई, जो 18 प्रतिशत की रिकॉर्ड गिरावट है.

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है की अगर रुपए की कीमत में भारी गिरावट पर रोक नहीं लगाई गई तो अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक असर होगा.

'आरबीआई की क्षमता सीमित'

विशेषज्ञ किशोर बयानी कहते हैं, "अगर रुपया इसी तरह से कमज़ोर होता रहा तो रिज़र्व बैंक आफ़ इंडिया के महंगाई पर काबू पाने की सारी कोशिशें बेकार हो जाएँगी."

लेकिन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा की रूपए के मूल्यांकन में गिरावट पर रोक लगाने के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की क्षमता सीमित ही है.

वित्त मंत्रालय के व्यपार विभाग के सचिव राहुल ख़ुल्लर ने निवेशकों से कहा कि उन्हें घबराने की ज़रुरत नहीं है. उनके अनुसार रूपए के मूल्यांकन में गिरावट का कारण अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट है.

मंगलवार को एक अमरीकी डॉलर के बदले रुपए की कीमत गिर कर 52.50 रुपए हो गई. इससे पहले डॉलर के मुकालबले रुपया इतना सस्ता कभी नहीं हुआ था. इस साल अब तक रुपए की कीमत में 14 प्रतिशत की गिरावट आई है.

भाजपा ने महँगाई पर लताड़ा

उधर मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि आर्थिक नीति बनाते समय सम्रग पहलुओं को देखते हुए बनती है, ऐसा नहीं कि उसमें महँगाई पर ध्यान नहीं दिया जाता.

उनका कहना था, "सरकार बार-बार अंतरराष्ट्रीय स्थिति की दुहाई दे रही है. मुद्दा ये है कि इतनी गिरावट - 1.5 से दो प्रतिशत हर रोज़ भला क्यों हो रही है. पैसा देश के बाहर जा रहा है, लोग डॉलर ख़रीद रहे हैं और डॉलर की उपलब्धता में कमी आने के कारण रुपए की कीमत गिर रही है यानी एक डॉलर के पीछे ज़्यादा रुपए देने पड़ रहे हैं. हम सरकार के किसी स्पष्टीकरण से सहमत नहीं है. सरकार महँगाई को राष्ट्रीय समस्या नहीं मान रही है."

आरबीआई ने पिछले डेढ़ साल में महंगाई घटाने के लिए ब्याज दरें बढाई हैं लेकिन इसका कोई ख़ास असर नहीं हुआ है. अब कमज़ोर रूपए से आरबीआई द्वारा उठाए गए कदम भी बेमाने हो जाते हैं.

भारत के सकल घरेलु उत्पाद का लगभग पाँचवां हिस्सा निर्यात का होता है. अब कमज़ोर रुपए के कारण आयात पर भी बुरा असर होगा. भारत अपनी ज़रुरत का लगभग 70 फ़ीसदी तेल विदेशों से आयात करता है.

लेकिन केंद्र सरकार का मानना है कि यह गिरावट केवल फ़िलहाल के लिए हैं और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने निवेशकों को विश्वास दिलाया है कि रुपया एक बार फिर जल्द ही मज़बूत होगा.

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