रीटेल में एफ़डीआई: कुछ सवाल-जवाब

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भारत सरकार ने जब से मल्टी ब्रांड रीटेल के क्षेत्र को विदेशी निवेश के लिए खोलने की बात की है तब से देश में एक तूफ़ान उठ खड़ा हुआ है. घोषणा होते ही राजनेता, उद्योग जगत या फिर मीडिया- हर कोई इस मुद्दे पर बँटा लगने लगा. ऐसे में एक नज़र देश में खुदरा व्यापार से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर-

भारतीय रीटेल बाज़ार कितना बड़ा है?

अनुमानों के मुताबिक भारत का रीटेल या खुदरा बाज़ार 400 से 500 अरब डॉलर का है. अभी तक इस बाज़ार पर आधिपत्य असंगठित क्षेत्र का ही है. भारत के रीटेल क्षेत्र के सटीक आँकड़ों के उपलब्ध न होने के सबसे बड़े कारणों में से यह एक मुख्य कारण है.

भारत में अभी रीटेल व्यवसाय मुख्यतः किस तरह से बँटा है?

मुख्यतः दवा, संगीत, पुस्तकें, टीवी फ़्रिज जैसे उपभोक्ता उत्पाद, कपड़े, रत्न और गहने के अलावा खाद्य सामग्रियों को अलग-अलग बाजारों में वर्गीकृत किया जा सकता है. अभी इन सभी बाज़ारों में असंगठित क्षेत्र का कब्ज़ा है. लगभग हर बाज़ार में संगठित क्षेत्र की कंपनियाँ पैठ बनाने की कोशिश कर रही हैं.

दवा के क्षेत्र में रेलिगेयर, अपोलो फ़ार्मेसीज़, और गार्डियन की तरह की कई श्रृंखलाएँ बाज़ार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं. इसी तरह से संगीत का बाज़ार भी पूरी तरह से असंगठित क्षेत्र के हाथों में हैं. इस बाज़ार की सबसे बड़ी समस्या नक़ल है.

भिन्न-भिन्न बाज़ारों को एक छत के नीचे लाने की कोशिश कई भारतीय कंपनियों ने की है लेकिन अभी तक किसी ने बाज़ार का नक़्शा बदलने में सफलता नहीं पाई है.

क्या रीटेल के क्षेत्र में मल्टीब्रांड रीटेल भारत के लिए नया है?

नहीं. भारत में मल्टीब्रांड रीटेल के क्षेत्र में पिछले कुछ सालों से निजी कंपनियाँ चल रही हैं. अभी तक के अनुमानों के मुताबिक क़रीब 90 फ़ीसदी बाज़ार पर छोटे व्यापारियों का कब्ज़ा है.

भारतीय मल्टीब्रांड रीटेल में कौन हैं बड़े खिलाड़ी ?

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Image caption टाटा बिरला जैसे समूहों के बड़े प्रयासों के बावजूद असंगठित क्षेत्र का कब्ज़ा बाज़ार पर बरक़रार है

पेंटालून रीटेल सबसे बड़े मल्टीब्रांड व्यापारियों में से एक है. बिग बाज़ार के नाम से चलने वाली विशाल दुकानों के साथ यह कंपनी संगठित बाज़ार में सबसे ऊपर है. फ़्यूचर समूह जो पेंटालून रीटेल की मालिक है वह कपड़ों, जूतों सहित कई और बाज़ारों में भी मज़बूत खिलाड़ी है. इस समूह की देश भर में क़रीब 500 से ऊपर छोटी-बड़ी दुकानें हैं. दुनिया की सबसे बड़ी रीटेल कंपनियों में से एक फ़्रांस की कारफ़ोर से फ़्यूचर समूह के तार जोड़ कर देखे जाते हैं.

इस क्षेत्र में दूसरा सबसे बड़ा समूह है रिलायंस रीटेल. मुकेश अंबानी समूह की यह कंपनी भारत में छोटे-बड़े क़रीब एक हज़ार स्टोर चलाती है. रिलायंस मार्ट से लेकर, रिलायंस फ़्रेश और रिलायंस फ़ुटप्रिंट की तरह की कई दुकाने इस समूह द्वारा चलाई जाती हैं.

के रहेजा समूह की शॉपर्स स्टॉप, क्रॉसवर्ड, हायपर सिटी की नामों से कई तरह की रीटेल दुकानें चलती हैं.

कुल मिलाकर टाटा, आदित्य बिरला समूह से लेकर आरपीजी, भारती और महिन्द्रा तक भारत के सभी बड़े औद्योगिक समूह रीटेल के क्षेत्र में किसी न किसी तरह से अपनी मौजूदगी रखते हैं.

वैश्विक स्तर पर रीटेल के क्षेत्र के सबसे बड़े खिलाड़ी कौन हैं और वह सब क्या भारत से गायब हैं?

वॉलमार्ट: यह कंपनी भारत के भारती समूह के साथ मिलकर छह बड़ी दुकानें चलाती है. इन दुकानों में किसानों से सामान लेकर थोक विक्रेताओं को बेचा जाता है.

टेस्को: ब्रिटेन की सबसे बड़ी रीटेल कंपनी टेस्को भारत में टाटा समूह की रीटेल कंपनी ट्रेंट के साथ मिल कर काम करती है.

मेट्रो: जर्मनी की रिटेल कंपनी मेट्रो एजी भारत में छह थोक दुकानें चलाती है.

कारफोर: फ़्रांस की यह कंपनी दिल्ली में दो थोक दुकानें चला रही है.

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