जल्द न बदले तो विश्व के इतिहास में यूरोप का ज़िक्र न होगा: सार्कोज़ी

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Image caption इटली और स्पेन अरबों यूरो के गंभीर क़र्ज़ से जूझ रहे हैं

फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने कहा है कि वे 'यूरोप का भविष्य सुनिश्चित करने के लिए' सोमवार को जर्मन चांस्लर एंगेला मर्कल के साथ एक संयुक्त योजना का अनावरण करेंगे.

क़र्ज़ में डूबे यूरोज़ोन देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बचाने, यूरो मुद्रा में स्थिरता लाने और यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्थाओं में अनुशासन लाने के मक़सद से उन्होंने ये घोषणा की है.

यूरोप में आयरलैंड, पुर्तगाल, ग्रीस की अर्थव्यवस्थाओं की तो यूरोज़ोन ने मदद की है लेकिन अब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती अरबों यूरो के क़र्ज़ में डूबी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं - इटली और स्पेन को बचाने का है.

साथ ही उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि फ़्रांस अपनी संप्रभुता को नहीं त्याग रहा है. उन्होंने कहा कि यदि यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्थाएँ एकजुट होकर नहीं चलतीं तो यूरो का अस्तित्व संकट में रहेगा.

सार्कोज़ा का कहना था कि फ़्रांस इसलिए लड़ रहा है ताकि दुनिया में भविष्य में भी यूरोप का आवाज़ सुनी जाए.

'यूरोपीय संघ की नई संधि'

फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने दक्षिणी फ़्रांस में एक भाषण में कहा, "यदि जल्द ही यूरोप जल्द ही नहीं बदलता तो विश्व का इतिहास यूरोप के बिना ही लिखा जाएगा...फ़्रास को इस बारे में पूरा विश्वास है. जर्मनी को इस बारे में पूरा विश्वास है."

उनका कहना था, "यूरोप को अधिक एकजुटता की ज़रूरत है और इसका मतलब है अनुशासन. यदि यूरोप एकजुट रहता है तभी वह संयुक्त और शक्तिशाली रहेगा. यदि जर्मनी और फ़्रांस अलग-अलग रहते हैं तो यूरोप भी कमज़ोर रहेगा. मैं सोमवार को चांस्लर मर्केल से पेरिस में मिलूँगा और मिलकर हम यूरोप के भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रस्ताव रखेंगे...इसलिए यूरोप के बारे में पुनर्विचार ज़रूरी है...ज़रूरी है कि यूरोप को दोबारा परिभाषित किया जाए. दुनिया यूरोप के लिए इंतज़ार नहीं करेगी."

सार्कोज़ी ने कहा कि फ़्रांस और जर्मनी को आगे आने वाले किसी भी संकट से निपटने के लिए नई यूरोपीय संघ की संधि की ज़रूरत पड़ेगी.

उन्होंने कहा, "इसीलिए फ़्रांस और जर्मनी नई यूरोपीय संघ की संधि के पक्ष में हैं जिससे यूरोप की व्यवस्था पर पुनर्विचार हो सके. यूरोज़ोन और यूरोप के भविष्य के बारे में अधिक अनुशासन, अधिक एकजुटता, आर्थिक मामलों में लोगों के प्रति अधिक ज़िम्मेदारियाँ हों."

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