विकास के घटते पूर्वानुमानों के साथ बाज़ार गिरे

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Image caption भारतीय शेयर बाज़ार अर्थव्यवस्था को लेकर नकारात्मक दिख रहे हैं

बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक शुक्रवार को 287 अंक नीचे गिर कर बंद हुआ. एक तरफ़ यूरोप का संकट तो दूसरी तरफ़ धीमी पड़ती भारतीय अर्थव्यवस्था दोनों के असर शेयर बाज़ारों पर साफ़ दिखे.

भारतीय वित्त मंत्री प्रणब मुख़र्जी ने शुक्रवार को संसद में बताया कि देश में अर्थव्यवस्था की विकास की दर के पूर्वानुमानों को घटा कर 7.5 प्रतिशत कर दिया गया है.

वित्तीय साल 2011-12 के आरंभ में देश के आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया था कि देश की अर्थव्यवस्था नौ प्रतिशत की रफ़्तार से बढ़ेगी.

मुख़र्जी ने संसद में कहा," हम अगले साल अर्थव्यवस्था में कुछ सुधार की आशा रखते हैं पर हालत मिले-जुले संकेत दे रहे हैं. अर्थव्यवस्था मूल रूप से अभी भी मज़बूत है अगर अमरीका और यूरोप स्थिर रहते हैं तो इस बात की संभावना है कि हम विकास के नौ प्रतिशत के आंकड़े को पा लें."

रेटिंग एजेंसी अधिक चिंतित

भारत की सबसे बड़ी रेटिंग एजेंसियों में से एक क्रिसिल ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था की गति दरअसल वित्त मंत्री के द्वारा जारी किये गए पूर्वानुमानों से भी धीरे हो सकती है.

क्रिसिल के अनुसार अर्थव्यवस्था की विकास की रफ़्तार घट तक सात प्रतिशत तक पहुँच सकती है. अक्तूबर में क्रिसिल का मानना था कि अर्थवयवस्था के बढ़ने की गति 7.6 प्रतिशत रह सकती है.

सात फ़ीसदी का आंकडा पिछले नौ सालों में दूसरा सबसे कम आकंडा होगा. वैश्विक आर्थिक संकट के चरम पर वित्तीय वर्ष 2008 -2009 भारतीय अर्थव्यवस्था महज़ 6.8 प्रतिशत की रफ़्तार रह गई थी.

भारतीय बाज़ारों में गिरावट

पिछले कुछ दिनों से लगातार आ रही नकारात्मक ख़बरों और भारतीय उद्योग जगत में सुधार का कोई संकेत ना होने का असर भारतीय बाजारों पर साफ़ दिखा. बंबई स्टॉक एक्सचेज और नेशनल स्टॉक एक्सचेज दोनों क़रीब डेढ़ फ़ीसदी नीचे गिर कर बंद हुए.

फ़ार्मा कंपनियों को छोड़ कर लगभग सभी तरह की कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई.

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