आर्थिक नीतियों पर राजनीतिक पार्टियों को साथ आना होगा-प्रणब

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Image caption वित्त मंत्री ने सभी पार्टियों से आर्थिक नीतियों पर सरकार का साथ देने की अपील की.

महंगाई पर लोकसभा में चर्चा पर सरकार का जवाब देते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि वैश्विक आर्थिक संकट के मद्देनज़र आर्थिक नीतियों पर राजनीतिक पार्टियां को साथ आना होगा.

वित्त मंत्री ने कहा कि मंदी के इस समय में भी सकल घरेलू उत्पात सात फीसदी के आसपास बना हुआ है जो कि एक अच्छा संकेत है. लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि उत्पाद क्षेत्र में आठ से 12 फीसदी विकास नाकाफी है.

प्रणब मुखर्जी ने कहा, "अगर हम सबसे ऊंचे संवैधानिक मंच, संसद को, प्रदर्शनों की जगह बना दें तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे, सभी राजनीतिक पार्टियों को साथ आना होगा ताकि ये संदेश जाए कि देश की प्रगति के हित में सभी प्रमुख आर्थिक मुद्दों पर सहमति बनाई गई है".

देश में बढ़ती महंगाई के लिए वित्त मंत्री ने विश्व में बढ़ते दामों को ज़िम्मेदार बताया.

वैश्विक कारणों से महंगाई

गुरुवार को लोकसभा में नेता, विपक्ष, सुष्मा स्वराज ने कहा था कि तेल के अलावा ऐसे कोई पदार्थ नहीं जिनकी आड़ में सरकार ये तर्क दे.

लेकिन आज प्रणब मुखर्जी ने कहा कि यूरिया, इस्पात और पाम ऑइल जैसी कई चीज़ों के लिए भारत आयात पर निर्भर है और इसलिए उनके बढ़ते दाम देश में महंगाई बढ़ा रहे हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में गिरावट दर्ज की गई है और 26 नवंबर को ख़त्म हुए सप्ताह में मुद्रास्फीति की दर गिरकर दो वर्ष में सबसे कम 6.60 प्रतिशत पर पहुँच गई है.

वित्त मंत्री ने कहा महंगाई कम होने में समय लगेगा और तब तक सरकार की कोशिश है कि वो सबसे निम्न वर्ग के लोगों को इसके दबाव से जूझने में मदद करे. उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार जन वितरण प्रणाली के तहत सस्ते दाम पर गेहूं और चावल उनतक पहुंचा रही है.

लेकिन वित्त मंत्री के जवाब पर असंतुष्टि ज़ाहिर करते हुए विपक्ष ने उनका भाषण समाप्त होने के बाद संसद से वॉकआउट कर दिया.

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