भारतीय शेयर बाज़ार में व्यक्तिगत विदेशी निवेश को मंज़ूरी

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Image caption बीएसई सूचकांक में पिछले साल 24.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

भारत सरकार ने शेयर बाज़ार में सीधे व्यक्तिगत विदेशी निवेश की अनुमति दे दी है.

रविवार देर शाम जारी एक बयान में वित्त मंत्रालय ने कहा है कि बाज़ार नियामक प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी और रिज़र्व बैंक इसे लागू करने के लिए 15 जनवरी तक आवश्यक सर्क्यूलर जारी करेंगे.

अबतक विदेशी नागरिकों को भारत के शेयर बाज़ार में सीधे निवेश करने की अनुमति नहीं थी और वो विदेशी निवेशक म्यूचुअल फंड जैसे अप्रत्यक्ष तरीक़े से ही ऐसा कर सकते थे.

कुछ जानकार कहते हैं कि भारत सरकार के इस क़दम को उसकी अर्थव्यवस्था को और उदार बनाने के प्रयास के तौर पर देखा जा सकता है.

इरादा

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कि क़दम अधिक से अधिक विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने, बाज़ार की अस्थिरता दूर करने और पूंजी बाज़ार को मज़बूत करने के इरादे से उठाया है.

भारत में बाज़ार नियामक प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी के मुताबिक़, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने छह लाख करोड़ रूपये से ज़्यादा मूल्य के शेयर वर्ष 2011 के दौरान ख़रीदे, लेकिन इससे कहीं ज़्यादा मूल्य के शेयर बेच दिए जिसकी वज़ह से बीते साल 2700 करोड़ रूपए से ज़्यादा धन शेयर बाज़ार से बाहर चला गया.

गिरावट

वर्ष 2010 में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाज़ार में 1.3 लाख करोड़ रूपए का निवेश किया था.

भारत एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है लेकिन इसके 30 शेयरों पर आधारित बीएसई सूचकांक में वर्ष 2011 में 24.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज़ की गई.

इस वज़ह से भारतीय मुद्रा रूपये की क़ीमत में डॉलर के मुक़ाबले 24 प्रतिशत तक की गिरावट आ गई थी.

कई अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि 30 मार्च को ख़त्म होने वाले भारत के वित्तीय वर्ष में उसकी विकास दर सात प्रतिशत से क़म रहेगी.

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