मोबाइल कंपनी की तरह बैंक भी बदलिए

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Image caption मोबाइल नंबर की तरह ही बैंक उपभोक्ता असंतुष्ट होने पर अपने खाते को दूसरे बैंक में जा सकेगें

मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तर्ज पर भारत सरकार और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया अब यह कोशिश कर रहे हैं कि भारत के तमाम बचत खातेदार अपने एक ही खाते नंबर को कभी भी कहीं भी भारत में किसी बैंक में ले जा सकें.

भारत के वित्तीय सेवा सचिव डीके मित्तल की मानें तो इस दिशा में काम शुरू हो चुका है और इसे लागू करने की दिशा में आने वाले तकनीकी गतिरोधों की पहचान कर ली गई है.

अगर यह लागू हो जाता है तो ऐसे तमाम भारतीय जो कामकाज को लेकर भारत के भिन्न-भिन्न हिस्सों में अपने घरों से दूर जा बसे हैं उन्हें बेहद सुविधा होगी.

अभी निजी क्षेत्र में काम करने वाले अधिकारियों से लेकर भारत के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक काम करने के लिए जाने वाले मज़दूरों के सामने सबसे बड़ी बाधा यह होती है कि नई जगह पर उनके पास पते का कोई सबूत नहीं होता. बिना पते के मान्य सबूत के भारत में कोई भी बैंक खाता नहीं खोल सकता.

चुनौतियाँ

भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीयकृत बैंकों में से एक से रिटायर हुए नंदन श्रीवास्तव कहते हैं कि बैंकों के सामने तकनीकी और वित्तीय- कई तरह की चुनौतियां होंगी.

श्रीवास्तव कहते हैं कि भारत में निजी क्षेत्र के विदेशी बैंकों से लेकर राष्ट्रीयकृत और ग्रामीण बैंक तक में कई तरह के बैंक काम करते हैं और सबकी तकनीकी और वित्तीय क्षमताएं अलग अलग हैं.

इन सभी बैंकों को तकनीकी रूप से अपने सॉफ़्टवेयर में समानताएँ लानी होंगी ताकि बैंकों के बचत खाते एक ही नंबर पर सदा चल सकें और ग्राहक को हर बार नए सिरे से अपने पते के सबूत न जुटाने पड़ें.

श्रीवास्तव जो कि एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में बड़े पद पर कार्यरत थे उनका कहना है, "अपने कामकाज का पूरी तरह से कम्प्यूटरीकरण करना एक बहुत ही महँगा काम है. भारत में अधिकतर बैंकों में कोर बैंकिंग के रूप में यह होता है पर छोटे बैंकों के लिए एक बड़ा फ़ैसला होगा."

श्रीवास्तव ज़ोर देकर कहते हैं कि उपभोक्ता और अपने व्यवसाय के हित में अपने काम-काज के पूर्ण कम्प्यूटरीकरण का क़दम तो छोटे-बड़े सभी बैंकों को उठाना ही होगा.

व्यावहारिकता

श्रीवास्तव का बैंकिंग क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव है और वो आशान्वित हैं कि भारत में यह संभव है. वो ज़ोर देकर कहते हैं, "आज कई ग्रामीण बैंक जिनकी परिकल्पना ही कम लागत के बैंकों के रूप में की गई थी अपने ग्राहकों को कम्प्यूटरीकृत सेवाएँ उपलब्ध करा रहे हैं तो ऐसी उम्मीद की जा सकती है कि एक दिन वाक़ई बचत खाते की पोर्टेबिलिटी शुरू हो जाएगी."

यानि अगर सब कुछ योजना मुताबिक चला तो जीवन में एक बार खाता खुलवाने के बाद आप हमेशा के लिए निश्चिन्त हो जाएंगे कि अगर कहीं आपने अपना पता बदला तो आपको नए सिरे से सारे सबूत जुटाने के लिए पापड़ नहीं बेलने होंगे.

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