एक ब्रांड के खुदरा व्यापार में 100 फ़ीसदी एफ़डीआई

 बुधवार, 11 जनवरी, 2012 को 12:18 IST तक के समाचार

अब तक लीवाई स्ट्रॉस जैसी विदेशी कंपनियां भारतीय ख़ुदरा व्यापार में 51 प्रतिशत निवेश ही कर सकती थीं.

भारत सरकार ने एक ब्रांड के खुदरा व्यापार में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़डीआई) की अधिसूचना जारी कर दी है. ये फ़ैसला तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है.

यानी अब जूतों की कंपनी रीबॉक, फ़र्नीचर की आइकिया, लाइफ़स्टाइल साज़ो-सामान की गुच्ची जैसे बड़े विदेशी ब्रांड्स भारत में पूरे मालिकाना हक़ के साथ दुकानें खोल सकेंगे.

अब तक भारत में एक ब्रांड के खुदरा व्यापार में 51 प्रतिशत एफ़डीआई को मंज़ूरी थी.

मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक 51 प्रतिशत से ज़्यादा एफ़डीआई वाले खुदरा व्यापार में कुल बिक्री के कम से कम 30 प्रतिशत मूल्य का सामान छोटे और लघु उद्योगों से ख़रीदा जाएगा.

आनंद शर्मा, वाणिज्य मंत्री

"अब इस नई शर्त के साथ निवेश की सीमा 51 से 100 प्रतिशत तक बढ़ाने से घरेलू उत्पादन में तेज़ी आएगी और लघु उद्योग में तकनीकी विकास का मौका मिलेगा."

वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने बयान जारी करते हुए कहा, “एक ब्रांड के खुदरा व्यापार में एफ़डीआई को मंज़ूरी देने से बड़ी विदेशी कंपनियाँ भारतीय बाज़ार में उतरी हैं, अब इस नई शर्त के साथ निवेश की सीमा 51 से 100 प्रतिशत तक बढ़ाने से घरेलू उत्पादन में तेज़ी आएगी और लघु उद्योग में तकनीकी विकास का मौका मिलेगा.”

एक से ज़्यादा ब्रांड में एफ़डीआई?

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान मंत्रिमंडल की बैठक में फ़ैसला लिया गया था कि भारत में खुदरा व्यापार में एक ब्रांड में 100 प्रतिशत और मल्टी-ब्रांड में 51 प्रतिशत एफ़डीआई को अनुमति दी जाए.

लेकिन विपक्षी पार्टियों और तृणमूल कांग्रेस समेत सरकार के सहयोगी दलों के पुरज़ोर विरोध के बाद मल्टी-ब्रांड खुदरा व्यापार में एफ़डीआई के फ़ैसले पर फ़िलहाल रोक लगा दी गई.

सरकार के इस फ़ैसले की उद्योग संगठनों ने आलोचना की थी. उद्योग संगठन एसोचैम ने कहा था कि राजनीतिक दबाव में किए गए इस फ़ैसले से विदेश में भारत की छवि को नुक़सान पहुँचेगा और गिरते रुपए की क़ीमत पर और दबाव पड़ेगा.

वहीं छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों ने इसका स्वागत किया और साथ ही एक ब्रांड के खुदरा व्यापार में एफ़डीआई की सीमा बढ़ाए जाने पर चिंता जताई थी. उनके मुताबिक इससे उनके व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा और बड़ी कंपनियों के सामने वो टिक नहीं पाएंगे.

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