भारत में अनाज का उत्पादन घटने की आशंका

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Image caption सीएसओ ने मौजूदा वित्त वर्ष ख़त्म होने से पहले ये अनुमान जारी किए हैं जिनसे सरकार को बजट बनाने में मदद मिलेगी

कृषि प्रधान देश भारत में अनाज के उत्पादन में ज़बर्दस्त गिरावट आ सकती है. ये अनुमान किसी और ने नहीं बल्कि भारत के एक सरकारी संगठन ने ही जताया है.

केंद्रीय सांख्यिकी संगठन यानी सीएसओ ने कहा है कि वर्ष 2011-12 में देश के कृषि उत्पादन में महज ढाई प्रतिशत की बढोतरी हो सकेगी.

ये चिंता की बात इसलिए है क्योंकि वर्ष 2010-11 के दौरान कृषि क्षेत्र में सात प्रतिशत की बढोतरी हुई थी और अब ये आंकड़ा सात से गिरकर सीधे ढाई प्रतिशत पर आ गया है.

इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा.

सीएसओ ने देश की आर्थिक विकास दर वर्ष 2011-12 के दौरान तीन साल के सबसे निचले स्तर 6.9 प्रतिशत रहने का भी अनुमान जताया है.

सीएसओ ने निर्माण, कृषि और खनन जैसे क्षेत्रों में तेज़ गिरावट को इसकी मुख्य वजह बताया है. पिछले वित्त वर्ष में भारत की विकास दर 8.4 प्रतिशत दर्ज़ की गई थी.

सोमवार को अनुमान जारी करते हुए सीएसओ ने कि वर्ष 2011-12 में कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के क्षेत्रों में 2.5 प्रतिशत की दर से बढ़त हो सकती है. वित्त वर्ष 2010-11 के दौरान ये दर सात प्रतिशत थी.

सीएसओ का कहना कि निर्माण क्षेत्र में वृद्धि दर बीते साल के 7.6 प्रतिशत के मुक़ाबले 3.9 प्रतिशत रह सकती है.

सकल घरेलू उत्पाद

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Image caption सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक ने पहले ही कहा था कि दुनियाभर में आर्थिक मंदी और ऊंची घरेलू ब्याज दरों का इस वित्तीय वर्ष में वृद्धि के अनुमानों पर असर पड़ेगा

भारत के केंद्रीय रिज़र्व बैंक ने पिछले महीने मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा करते हुए सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी में वृद्धि दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था.

लेकिन सीएसओ ने जीडीपी दर सात प्रतिशत से भी कम रहने की आशंका जताई है.

मध्यावधि आर्थिक समीक्षा में सरकार ने जीडीपी दर साढे सात प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था.

सरकार ने बीते साल फ़रवरी में बजट पूर्व सर्वेक्षण में वर्ष 2011-12 के लिए जीडीपी में वृद्धि दर नौ प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था लेकिन ताज़ा अनुमान इससे बहुत कम है.

पूरे वित्तीय वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने के ताज़ा अनुमान का ये मतलब है कि वर्ष 2011-12 के दूसरे उत्तरार्ध में आर्थिक विस्तार की गति धीमी हुई.

अप्रैल-सितम्बर 2011 की अवधि में ये दर 7.3 प्रतिशत दर्ज़ हुई थी.

सीएसओ के नवीनतम अनुमानों के मुताबिक़, खनन क्षेत्र में 2.2 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है. पिछले वर्ष इस क्षेत्र में पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज़ की गई थी.

निर्माण क्षेत्र में भी वर्ष 2010-11 के 8 प्रतिशत के मुक़ाबले 4.8 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका जताई गई है.

सीएसओ का ये भी अनुमान है कि वित्त, बीमा, रियल इस्टेट और क़ारोबारी सेवाओं के क्षेत्र में बीते वित्तीय वर्ष के 10.4 प्रतिशत वृद्धि दर के मुक़ाबले वर्ष 2011-12 के दौरान वृद्धि दर 9.1 प्रतिशत रह सकती है.

योजना आयोग

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Image caption योजना आयोग इन अनुमानों से निराश नहीं है

जीडीपी में वृद्धि दर के बारे में सीएसओ के अनुमानों पर योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा, ''6.9 प्रतिशत की दर हमारी उन बातों से मेल खाती है जो हम कहते रहे हैं.''

उन्होंने कहा, ''हमने वर्ष 2011-12 के लिए सात प्रतिशत की दर बताई थी. पहले उत्तरार्ध में 7.3 प्रतिशत वृद्धि दर रही, तीसरी तिमाही में ये दर 6.9 प्रतिशत रही, इसलिए सात प्रतिशत भी संभव है.''

आंकड़ों के मुताबिक़, विद्युत, गैस और पनबिजली उत्पादन के क्षेत्र में इस साल अच्छी वृद्धि देखी जा सकती है.

इस क्षेत्र में वर्ष 2010-11 के दौरान तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. लेकिन वर्ष 2011-12 के दौरान वृद्धि दर बढ़कर 8.3 प्रतिशत तक हो सकती है.

मौज़ूदा वित्त वर्ष में होटल, परिवहन और संचार क्षेत्रों में वृद्धि दर 11.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है. पिछले साल इन क्षेत्रों में वृद्धि दर 11.1 प्रतिशत रही थी.

सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक ने पहले कहा था कि दुनियाभर में आर्थिक मंदी और ऊंची घरेलू ब्याज दरों का इस वित्तीय वर्ष में वृद्धि के अनुमानों पर असर पड़ेगा.

वर्ष 2010-11 और इससे पहले वर्ष 2009-10 में भारतीय अर्थव्यवस्था 8.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी. वर्ष 2008-09 में ये दर 6.7 प्रतिशत दर्ज़ की गई थी.

सीएसओ ने मौजूदा वित्त वर्ष ख़त्म होने से पहले ये अनुमान जारी किए हैं जिनसे सरकार को बजट बनाने में मदद मिलेगी.

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