ईरान को भुगतान पर 'सहमति' बनी

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Image caption भारत अपनी ज़रुरत का 12 प्रतिशत ईरान से आयात करता है

दिल्ली में ईरान के राजदूत ने कहा है कि ईरान से भारत को आयात किए जाने वाले तेल के बदले भुगतान को लेकर दोनों देशों के बीच 'सहमति' बन गई है.

इसके लिए अब ईरान के बैंक भारतीय बैंकों में खाते खोलेंगे.

ईरानी राजदूत सैयद मेहदी नबीज़ादे ने कहा है कि समझौते के अनुसार भारत इन खातों के ज़रिए आंशिक भुगतान भारतीय मुद्रा यानी रुपयों में भी कर सकेगा.

उन्होंने कहा कि जिन बैंकों में खाते खोले जाने हैं उनमें से एक युनाइटेड कमर्शियल बैंक (यूको) है लेकिन वे दूसरे बैंकों के नाम ज़ाहिर नहीं कर सकते.

सूत्रों का कहना है कि ईरानी बैंक या तो भारत में अपने खाते खोलेंगे या फिर वे अपनी शाखाएँ खोलेंगे.

भारत ईरान से तीन लाख 70 हज़ार बैरल प्रतिदिन के हिसाब से कच्चे तेल का आयात करता है, जो उसकी ज़रुरत का 12 फ़ीसदी है.

ईरान पर अमरीका और यूरोपीय देशों की ओर से लगाए गए प्रतिबंध के बाद भारत के लिए ये एक कठिन समस्या बनी हुई थी कि ईरान को कच्चे तेल का भुगतान किस तरह से किया जाए.

पिछले कुछ महीनों से तुर्की के ज़रिए भुगतान हो रहा था.

ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वजह से उस पर प्रतिबंध लगाया गया है.

आंशिक भुगतान रुपए में

राजदूत नबीज़ादे ने दिल्ली में एक प्रेसकॉन्फ़्रेंस में बताया, "ईरान कुल भुगतान का 45 प्रतिशत रुपयों में स्वीकार करेगा."

उन्होंने कहा, "पिछले हफ़्ते तेहरान में हुई बातचीत के अलावा दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई है इसके बाद ये सहमति बन सकी है."

राजदूत ने बताया कि इस बातचीत में रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया और ईरान के केंद्रीय बैंक ने भी हिस्सा लिया था.

समझौते के अनुसार ईरान को निर्यात किए जाने वाली मशीनें, धातुएँ, खनिज उत्पाद, दवाइयाँ और खनिज उपकरण को भी आंशिक भुगतान के रूप में स्वीकार किया जा सकता है.

नबीज़ादे ने कहा, "हम सभी विकल्पों की तलाश कर रहे हैं जिससे कि भारत के तेल आयात में बाधा न आए और नियमित रुप से भुगतान भी हो सके."

इससे पहले कुछ महीनों तक तुर्की के हल्कबैंक के ज़रिए ईरान को भुगतान कर रहा था लेकिन बाद में इस बैंक ने भारतीय तेल कंपनियों की ओर से भुगतान करने में असमर्थता जता दी थी.

भारत हर महीने ईरान को एक अरब डॉलर का भुगतान करता है.

ईरानी राजदूत का कहना है कि हालांकि भुगतान सोने के रूप में भी किया जा सकता था लेकिन ये सुविधाजनक नहीं था.

हालांकि अमरीका और यूरोपीय देश चाहते हैं कि ईरान से व्यवसाय बंद कर दिया जाए लेकिन भारत के वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी स्पष्ट कर चुके हैं भारत ईरान से तेल का आयात नहीं रोक रहा है.

अंतरराष्ट्रीय बिज़नेस कंसल्टेंसी ग्रुप ग्लोबल इनसाइट आईएनसी ने कहा है कि ईरान के कच्चे तेल पर प्रतिबंध लागू करवाना कठिन होगा क्योंकि एशिया की इस पर निर्भरता बहुत अधिक है.

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