एशिया में ड्रोन विमान का बढ़ता बाज़ार

 शनिवार, 18 फ़रवरी, 2012 को 02:03 IST तक के समाचार
सिंगापूर एयर शो

सिंगापूर एयर शो में ड्रोन की प्रदर्शनी

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनैतिक तनाव बने रहने के कारण वहां ड्रोन विमान की मांग बढ़ना तय है और इसका मतलब ये हुआ कि उस बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी पाने के लिए कुछ नए खिलाड़ी भी शामिल होंगे.

मानवरहित हवाई यान या यूएवी उद्योग में एक प्रमुख नाम अमरीकी कंपनी नौरथ्रॉप ग्रुमन एरोस्पेस सिस्टम्स के बिल शाइफ़र ने इस बारे में कहा, ''जापान, कोरिया, सिंगापूर, ऑस्ट्रेलिया, भारत जैसे देशों ने इस बारे में काफ़ी रूचि दिखाई है.''

ये अमरीकी कंपनी सिंगापूर में चल रहे एयर शो के दौरान ग्लोबल हॉक जैसे अपने ख़ास विमान की नुमाइश कर रहा है और संभावित ख़रीदारों को दिखा रहा है.

ग्लोबल हॉक विमान लगभग 10 हज़ार वर्ग मील के क्षेत्र की निगरानी रख सकता है और जेन्स डीफ़ेंस वीकली के जेम्स हार्डी के अनुसार एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों को इसी तरह की निगरानी रखने वाले मानवरहित विमान की तलाश है.

एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई हिस्सों में तनाव बना हुआ है जैसे दक्षिणी चीन सागर, स्प्रैटली आइलैंड्स, दक्षिण और उत्तर कोरिया के बीच सीमा विवाद वगैरह.

इसके कारण इस क्षेत्र के देश इस पर नज़र रखना चाहते हैं कि उनके पड़ोसी देश क्या कर रहें हैं.

बढ़ता बाज़ार

फ़्रॉस्ट और सलीवन के अनुसार एशिया-प्रशांत क्षेत्र में यूएवी का बाज़ार बहुत तेज़ी से बढ़ रहा रहा है और अब ये क्षेत्र अमरीका के बाद यूएवी का दूसरा सबसे बड़ा ख़रीदार बन गया है.

"एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 में एशिया-प्रशांत देशों ने यूएवी पर लगभग 59 करोड़ डॉलर ख़र्च किए जो कि एक अनुमान के अनुसार 2017 तक बढ़कर एक अरब 40 करोड़ डॉलर हो जाएगा. बड़े यूएवी के क्षेत्र में भारी निवेश करने वाली कंपनियों को एशिया-प्रशांत बाज़ार पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए क्योंकि यूरोप और अमरीका में रक्षा बजट में काफ़ी कटौती हो रही है."

फ़्रॉस्ट और सलीवन के ब्रुनो मक्किओलो

एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 में एशिया-प्रशांत देशों ने यूएवी पर लगभग 59 करोड़ डॉलर ख़र्च किए जो कि एक अनुमान के अनुसार 2017 तक बढ़कर एक अरब 40 करोड़ डॉलर हो जाएगा.

फ़्रॉस्ट और सलीवन के ब्रुनो मक्किओलो के अनुसार ''बड़े यूएवी के क्षेत्र में भारी निवेश करने वाली कंपनियों को एशिया-प्रशांत बाज़ार पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए क्योंकि यूरोप और अमरीका में रक्षा बजट में काफ़ी कटौती हो रही है.''

जान का नुक़सान किए बेग़ैर दुश्मन के क्षेत्र में सैन्य अभियान चलाने की ज़रूरत के कारण ही यूवीए उद्योग का विकास हुआ था.

इस उद्योग से जुड़े लोग कहते हैं, ''यूएवी उन कामों के लिए बनाए जाते हैं जो कि गंदा, नीरस और ख़तरनाक है.''

सबसे ज्यादा आकर्षण उन ड्रोन के लिए होता है जो युद्ध में काम आते हैं और जिनका अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में अमरीका इस्तेमाल करता हैं.

लेकिन अभी एशियाई देशों में हथियार युक्त ड्रोन की मांग उतनी ज्यादा नहीं बढ़ी है क्योंकि वे बहुत महंगे होतें हैं और उनके रख-रखाव के लिए काफ़ी जटिल ढांचे की ज़रूरत होती है.

वैकल्पिक इस्तेमाल

ग्लोबल हॉक

जापान में आए सुनामी के बाद राहत कार्यों में ग्लोबल हॉक की मदद ली गई थी.

लेकिन सैन्य उद्देश्यों के अलावा ऐसे भी यूएवी हैं जिनका इस्तेमाल मानवीय, पर्यावरण और कृषि के क्षेत्र में किया जाता है.

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी इन दिनों यूएवी का इस्तेमाल किया जा रहा है.

पिछले साल जापान में आए सुनामी के बाद राहत कार्यों के लिए ग्लोबल हॉक विमान का इस्तेमाल किया गया था.

इसके अलावा 2010 में हेती में आए भूकंप के बाद राहत कार्यों में ग्लोबल हॉक का प्रयोग किया गया था.

यूएवी के बढ़ते बाज़ार के कारण कई कंपनियां इस क्षेत्र में आने की कोशिश कर रही हैं लेकिन अभी कोई भी कंपनी इस क्षेत्र में अमरीकी और इसराइली कंपनी को चुनौती देने की स्थिति में नहीं पहुंच पाई है.

यूएवी के क्षेत्र मे अपनी उपलब्धियों को चीन अपने तक ही सीमित रखता है लेकिन सिंगापूर एयर शो में पहली बार एक चीनी कंपनी ने भी अपने मानवरहित हेलिकॉप्टर की प्रदर्शनी लगाई है.

चीनी कंपनी योताइस्क टेक्नोलोजी इस समय यूएवी बनाने वाली चीन की सबसे बड़ी निजि कंपनी है और अब वो इंडोनेशिया और मलेशिया के बाज़ार में अपने हेलिकॉप्टर के ज़रिए दाख़िल होना चाहता है, फिर उसके बाद दक्षिण पूर्वी एशिया के दूसरे देशों में घुसने की योजना है.

योताइस्क टेक्नोलोजी फिलहाल यूएवी के बाज़ार में भले ही कोई बड़ा ख़तरा ना हो लेकिन इतना ज़रूर है कि आख़िरकार आने वाले दिनों में एशिया ना केवल यूएवी का बड़ा बाज़ार बनेगा बल्कि यूएवी के क्षेत्र में वो दूसरे देशों के लिए बड़ी चुनौती भी बनेगा.

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