कच्चा तेल 43 महीनों में सबसे महंगा

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Image caption मध्यपूर्व में तनाव की वजह से तेल की कीमतें पहले ही बढ़ रही थीं

सऊदी अरब में एक तेल पाइप लाइन फटने की खबर के बाद गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले 43 महीनों में सबसे अधिक के स्तर पर पहुँच गईं.

न्यूयॉर्क बाजार में गुरुवार को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 5.74 डॉलर बढ़कर 128.40 डॉलर प्रति बैरल पहुँच गईं.

इससे पहले जुलाई 2008 में कीमतें इस स्तर तक पहुँचीं थीं.

ये कीमतें लीबिया में पिछले दिनों आई अस्थिरता के दौरान हुई वृद्धि से भी अधिक हैं.

सऊदी अधिकारियों ने इन रिपोर्टों का खंडन किया है और इसकी वजह से शुक्रवार को एशिया के बाजारों में इसकी कीमतों में कुछ कमी आई है.

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट 125.49 डॉलर की दर से और यूएस स्वीट क्रूड 108.47 डॉलर प्रति बैरल की दर से बिक रही थी.

कई वजहें

वैसे तेल की कीमतों में आई उछाल के पीछे कई वजहें हैं, जिनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रहा तनाव और क्षेत्रीय तनाव भी है.

कई कई देशों में आ रही समस्याओं की वजह से मांग और आपूर्ति पर फर्क पड़ा है और इसकी वजह से बाजार में अटकलों और अनिश्चितता का वातावरण बना है.

गुरुवार को ईरानी मीडिया ने खबर दी थी कि सऊदी अरब की एक तेल पाइप लाइन में विस्फोट हो गया है और इस खबर से बाजार में उछाल आ गया.

ये खबर ऐसे समय में आई जब अमरीका और उसके मित्र देशों के साथ ईरान का तनाव चरम पर है.

अमरीका ने हाल में ईरान के तेल निर्यात को निशाना बनाते हुए प्रतिबंध लगाए हैं. जबकि यूरोपीय संघ ने ईरान से तेल के आयात को प्रतिबंधित कर दिया था.

इसके जवाब में ईरान ने हॉर्मूज जलडमरुमध्य को बंद कर देने की धमकी दी है. इस मार्ग से सऊदी अरब सहित कई खाड़ी देशों का तेल निर्यात किया जाता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि इन सभी वजहों से तेल की कीमतें बढ़नी ही थीं लेकिन एक इस खबर ने इसको अचानक एक वजह दे दी.

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