किंगफिशर को एक और झटका

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Image caption किंगफिशर को सरकार ने सहायता देने से इनकार कर दिया है

आर्थिक संकट से जूझ रहे किंगफिशर एयरलाइन एक और मुसीबत में फँस गया है.

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) ने किंगफ़िशर को अपनी उस व्यवस्था से अलग कर दिया है, जिसके तहत वह अपने भुगतानों को वैश्विक स्तर पर समायोजित कर सकता था.

आईएटीए के संयुक्त निदेशक एलबर्ट टीजोएंग का कहना है कि यह निर्णय समय पर वैश्विक भुगतान न निपटाने की वजह से हुआ है.

समाचार एजेंसी पीटीआई का कहना है कि फ़रवरी के बाद से ऐसा दूसरी बार हुआ है.

आईएटीए के अधिकारियों का कहना है कि भुगतान की शर्तों का पालन करने पर ही किंगफ़िशर वापस इस व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है.

इससे पहले जब किंगफ़िशर को इस व्यवस्था से अलग किया गया था तो इसमें वापस शामिल होने में उसे दस दिनों का समय लगा था.

आईएटीए की इस व्यवस्था में दुनिया भर के एयरलाइन्स और उससे जुड़ी कंपनियाँ इसलिए शामिल होती हैं ताकि दूसरी एयरलाइनों और कंपनियों की ओर से दी जाने वाली सेवाओं के लिए भुगतान करना आसान हो.

आर्थिक संकट से जूझ रही किंगफ़िशर एयरलाइन के बैंक खातों को इनकम टैक्स, सर्विस टैक्स और एक्साइज टैक्स और कस्टम विभाग ने सील कर रखा है.

मई, 2005 के बाद से घाटे में चल रही किंगफ़िशर एयरलाइन को इस वर्ष दिसंबर की तिमाही में 444.26 करोड़ रुपयों का घाटा हुआ है.

वर्ष 2011 में उसे 1,027 करोड़ का घाटा हुआ था. उस पर 7,057 करोड़ का कर्ज़ है.

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