कपास निर्यात पर भारत ने दी ढिलाई

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Image caption भारत से निर्यात हुए कपास का 80 प्रतिशत चीन जाता है

भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि वो उस कपास की खेंप के निर्यात को नहीं रोकेगा, जिसे चार मार्च से पहले तक सीमा शुल्क विभाग की हरी झंडी मिल गई थी.

भारत सरकार ने सोमवार को कपास के निर्यात पर एकाएक प्रतिबंध लगा दिया था जिसकी वजह से दुनियाभर में कपास की कीमतें बढ़ गई हैं. कपास की पैदावार करने वाला भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है.

घरेलू कपड़ा उद्योग की जरूरतें पूरी करने के लिए भारत ने कपास निर्यात पर ऐसे समय प्रतिबंध लगाया, जब उसके सबसे बड़े ग्राहक चीन में कपास की जबरदस्त मांग है.

लेकिन भारत के कृषि मंत्री शरद पवार ने ये कहते हुए कपास निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग की है कि इससे कपास की खेती करने वाले देश के ही किसानों का नुकसान होता है.

'किसानों का खून चूस रहे हैं'

कृषि मामलों के जानकार देवेंद्र शर्मा ने बीबीसी को बताया, ''वाणिज्य मंत्रालय का ये कहना है कि देश की टेक्सटाइल मिलों को कपास की आपूर्ति के लिए ये प्रतिबंध जरूरी था. कपास का जो ज्यादा उत्पादन हुआ, उसका फायदा देश की मिलों को नहीं मिल रहा था और उन्हें बाहर से आयात करना पड़ रहा था. भारतीय मिलों को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ये प्रतिबंध लगाया गया है.''

कृषि मंत्री और कपास उगाने वाले किसानों के विरोध की क्या वजह है, ये पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ''भारत में किसानों ने ही देश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को हमेशा ही सब्सिडाइज किया है. कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेज की रिपोर्टों में सरकार ने खुद माना है कि किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से बीस प्रतिशत कम दाम दिए गए हैं ताकि इंडस्ट्री प्रतिस्पर्धा में बनी रहे.

उनका कहना है, ''इस बार भी इंडस्ट्री को बचाने के लिए किसानों को दांव पर लगा दिया गया है. कपास पैदा करने वाले किसान एक तरफ तो आत्महत्या कर रहे हैं और जब निर्यात बंद हो जाएगा तो दाम और भी कम हो जाएंगे, साथ ही किसानों की आत्महत्याओं के मामले बढ़ जाएंगे. समझ नहीं आता कि कब तक ये टेक्सटाइल इंडस्ट्री कपास के किसानों का खून चूसती रहेगी.''

चीन की नाराजगी

वहीं चीन के कॉटन इंडस्ट्री एसोसिएशन ने भारत से कपास निर्यात पर रोक को 'गैर-जिम्मेदाराना' बताते हुए कहा है कि इससे वैश्विक बाजार पर असर पड़ेगा.

हालांकि वाणिज्य मंत्रालय का बयान आने से कपास की कीमतों पर मोटे तौर पर कोई असर नहीं पड़ा है.

भारतीय बाजार में कपास के 170 किलोग्राम की एक गठरी का भाव 16,830 रूपए चल रहा है, वहीं न्यूयॉर्क के वायदा बाजार में कपास की कीमतों में थोड़ा इजाफा हुआ है.

वैसे कपास के निर्यातकों ने बयान का स्वागत किया है, हालांकि इसका असर केवल उन आपूर्तिकर्ताओं पर पड़ेगा जो विदेशी बाजारों में कपास भेजते हैं जिनकी संख्या बहुत ज्यादा नहीं है.

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष धीरेन एन सेठ का कहना है कि सरकार की ओर से ये एक स्वागत योग्य कदम है और इससे कपास की उस खेप के निर्यात की मंजूरी मिलेगी जिसे सीमा शुल्क अधिकारी हरी झंडी दिखा चुके थे.

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