बोइंग का एयर इंडिया को मुआवजा देने से इनकार

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Image caption बोइंग का कहना है कि वो अगले वर्ष से हर महीने दस ड्रीमलाइनर 787 विमान तैयार करेगा

बोइंग ने भारत सरकार के इस दावे से इनकार किया है कि वो ड्रीमलाइनर 787 विमानों की आपूर्ति में हुई देरी के लिए एयर इंडिया को मुआवजा देने पर राजी हो गया है.

नागरिक विमानन मंत्रालय के प्रशांत सुकुल ने दावा किया था कि दो हफ्ते पहले बोइंग 50 करोड़ डॉलर के भुगतान के लिए तैयार हो गया था.

कंपनी से इस आधार पर मुआवजा मांगा गया था कि वर्ष 2005 में उससे 27 बोइंग 787 समेत जिन विमानों की आपूर्ति का सौदा किया गया था, उसने उनकी आपूर्ति समय पर नहीं की.

ड्रीमलाइनर 787 विमानों की आपूर्ति में तीन साल की देरी हो गई है.

लेकिन बोइंग का कहना है कि वो ऐसे किसी करार पर सहमत ही नहीं हुआ था.

बोइंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिम अल्बाग का कहना है, ''जो समझौता हमने किया, हम उस पर टिप्पणी नहीं करते हैं, लेकिन मैं आपको इतना जरूर बता सकता हूं कि हम किसी के लिए 50 करोड़ डॉलर का चेक नहीं बना रहे हैं.''

बोइंग की सफलता

विमानों की आपूर्ति में देरी के बाद भी 787 ड्रीमलाइनर विमान बोइंग की एक बड़ी सफलता हैं.

बोइंग से इस तरह के 800 से ज्यादा विमान मांगे गए हैं. बोइंग का दावा है कि ड्रीमलाइनर विमान इस आकार वाले मौजूदा विमानों की तुलना में ईंधन की 20 प्रतिशत कम खपत करता है.

पश्चिम एशिया में राजनीतिक तनाव की वजह से तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं जिससे ईंधन की कम खपत करने वाले विमानों की मांग बढ़ने की संभावना है.

बोइंग का कहना है कि उसने अगले साल हर महीने दस ड्रीमलाइनर विमान तैयार करने का लक्ष्य रखा है ताकि लंबित विमानों की आपूर्ति की जा सके और भावी मांगों को समय पर पूरा किया जा सके.

कुछ आलोचकों ने बोइंग के इस लक्ष्य पर संदेह जताया है लेकिन बोइंग का कहना है कि वो अपना लक्ष्य पूरा करने के प्रति आश्वस्त है.

अल्बाग कहते हैं, ''आज की तारीख मुझे ऐसा कुछ नजर नहीं आता जिससे हमें मानना पड़े कि बोइंग की इतनी आपूर्ति नहीं कर पाएंगे. इसके लिए हमारे पास एक योजना है.''

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