आर्थिक सर्वेक्षण: भारत बड़ी अर्थव्यवस्था, लेकिन अभी भी ग़रीब

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Image caption औद्योगिक विकास में कमी का आर्थिक विकास की दर पर बहुत असर पड़ा है

मज़बूत आर्थिक विकास की वजह से भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है लेकिन देश में प्रति व्यक्ति आय अभी भी बहुत कम है.

गुरुवार को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत अभी भी जी-20 देशों में सबसे ग़रीब देश है.

इस आर्थिक सर्वेक्षण में उम्मीद जताई गई है कि पहली अप्रैल से शुरु होने जा रहे वित्तीय वर्ष में आर्थिक विकास की दर 7.6 प्रतिशत रहेगी.

संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में विकास की ऐसी उम्मीद वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने ऐसे समय में जताई है जब दिसंबर में खत्म हुई तिमाही के आंकड़े कह रहे हैं कि आर्थिक विकास की दर गिरकर 6.1 प्रतिशत रह गई है.

तीन वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जब आर्थिक विकास की दर सात प्रतिशत से नीचे चली गई है.

आर्थिक सर्वेक्षण: मुख्य बिंदु

इतना ही नहीं वित्तमंत्रालय ने वर्ष 2013-14 में आर्थिक विकास की दर 8.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है.

इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि मार्च में महंगाई की दर घटकर 6.5-7 प्रतिशत रहेगी.

औद्योगिक संस्था ऐसोचेम ने आर्थिक सर्वेक्षण पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है कि निवेश और आपूर्ति में कमी और मुद्रास्फीति की ऊँची दर के बावजूद लंबे समय में भारत विकास की राह पर चलता रहेगा.

विरोधाभास

आर्थिक सर्वेक्षण में इस विरोधाभास के बारे में कहा गया है, "भारत तेज़ विकास दर के साथ दुनिया के चौथे बड़ी अर्थव्यवस्था के रुप में उभरा है और प्रति व्यक्ति आय के मामले में अपनी स्थिति में सुधार भी किया है. लेकिन ये भी सच है कि प्रति व्यक्ति आय अभी भी बहुत कम है."

इसमें कहा गया है, "भारत ने अपनी स्थिति में सुधार किया है लेकिन जी-20 देशों में अब भी वह सबसे ग़रीब है."

इसका मतलब ये है कि विकास का फ़ायदा निचले स्तर तक नहीं पहुँच पा रहा है शायद इसीलिए रिपोर्ट में कहा गया है कि ये ज़ाहिर तौर पर सबसे बड़ी चुनौती दिखती है.

रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 1980 से वर्ष 2010 के बीच भारत ने 6.2 प्रतिशत की विकास दर हासिल कर लिया लेकिन इसी समयावधि में दुनिया की विकास दर 3.3 प्रतिशत रही.

इसका असर ये हुआ कि दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद में भारत की हिस्सेदारी इन वर्षों में 2.5 प्रतिशत से बढ़कर 5.5 प्रतिशत जा पहुँचा है.

कर राजस्व भी लक्ष्य से पीछे

सरकार ने लक्ष्य रखा था कि वह आर्थिक घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.6 प्रतिशत तक नीचे लाएगी और इस समय आशंका जताई जा रही है कि सरकार अपने लक्ष्य से काफ़ी पीछे रहने वाली है.

इसकी वजह टैक्स से प्राप्त होने वाले राजस्व में कमी और सब्सिडी पर खर्च की जाने वाली भारी भरकम राशि बताई जा रही है.

पिछले वर्ष बजट में सकल कर राजस्व के 17.3 तक होने का अनुमान किया गया था लेकिन इस वित्तीय वर्ष में कर राजस्व में बढ़ोत्तरी 12.2 प्रतिशत ही हुई है.

इसके बावजूद वित्त मंत्रालय की इस अहम रिपोर्ट में पहली अप्रैल से शुरु होने वाले वित्तीय वर्ष में वित्तीय घाटे का लक्ष्य 4.1 प्रतिशत और वित्तीय वर्ष 2013-14 के लिए लक्ष्य 3.5 प्रतिशत रखा गया है.

चालू वित्तीय वर्ष में कमज़ोर औद्योगिक विकास की वजह से आर्थिक विकास की दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान किया गया है.

इसमें कहा गया है, "वित्तीय वर्ष 2011-12 के परिणाम देश के मौजूदा आर्थिक हालात से प्रभावित होंगे जिसकी वजह से औद्योगिक विकास की दर धीमी है और लागत मूल्य में बढ़ोत्तरी की वजह से लाभांश कम हुआ है."

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में विकास की दर बरकरार रहने से आर्थिक विकास की दर अगले दो वर्षों में पटरी पर लौट आएगी.

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