किंगफिशर ने अंतरराष्ट्रीय सेवा रोकी, लाइसेंस बरकरार

 बुधवार, 21 मार्च, 2012 को 19:47 IST तक के समाचार
किंगफिशर एयरलाइं

आर्थिक समस्या से ग्रस्त किंगफिशर एयरलाइंस ने हाल ही में कई फ्लाइटें बंद की है.

आर्थिक तंगी से जूझ रही विमानन सेवा कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस ने अंतरराष्ट्रीय सेवाएं बंद करने और भारत में फ्लाइटों की संख्या कम करने का फैसला लिया है.

ये फैसला डीजीसीए के उस बयान के बाद लिया गया जिसमें कहा गया था कि वो कंपनी का लाइसेंस तो निरस्त नहीं करेगी लेकिन स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

अरबपति विजय मालया की कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस की फ्लाइटें यूरोप समेत कई एशियाई देशों में जाती हैं.

आर्थिक समस्या से ग्रस्त किंगफिशर एयरलाइंस ने हाल ही में कई फ्लाइटें बंद की है.

बैंकों के किंगफिशर को और आर्थिक अधिक मदद देने से मना करने के बाद कंपनी को दैनिक खर्चों से निबटना कठिन हो गया.

बकाया

किंगफिशर को हवाई अड्डों, कर विभागों, बाहरी देनदारों के अलावा खुद के कर्मचारियों भी पैसे देने है.

"हमने सरकार को कोई महत्वाकांक्षी रास्ते नहीं सुझाए. हमने फ्लाइटों को रोकने की अपनी योजना से उनहे अवगत कराया है."

विजय माल्या, किंगफिशर एयरलाइंस के मालिक

मंगलवार को किंगफिशर ने कहा कि वो देश में अपने फ्लाइटों की दैनिक संख्या 110 से 125 तक सीमित करेगी. अक्तूबर में कंपनी प्रतिदिन 340 फ्लाइटों का संचालन करती थी.

कंपनी ने कहा कि आठ गंतव्यों पर जाने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय फ्लाइटें 10 अप्रैल तक बंद कर दी जाएगी.

विजय माल्या को कहा गया कि वो डीजीसीए और सरकार को बकाए की वापसी के लिए रास्ता सुझाए या फिर कंपनी का लाइसेंस निरस्त किया जाए.

योजना

"परेशानी की बात तो ये है कि पिछले दो-तीन महीनों में उन्होंने की योजनाएं सुझाई हैं लेकिन काम एक पर भी नहीं किया."

अजित सिंह, नागरिक उड्डयन मंत्री

नागरिक उड्डयन महानिदेशक यानी कि डीजीसीए के प्रमुख भारत भूषण के साथ बातचीत के बाद विजय माल्या ने पत्रकारों को बताया, “हमने सरकार को कोई महत्वाकांक्षी रास्ते नहीं सुझाए. हमने फ्लाइटों को रोकने की अपनी योजना से उनहे अवगत कराया है.”

हालांकि सरकार किंगफिशर की वित्तीय हालत से आश्वस्त नहीं दिखता.

नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने कहा, “परेशानी की बात तो ये है कि पिछले दो-तीन महीनों में उन्होंने की योजनाएं सुझाई हैं लेकिन काम एक पर भी नहीं किया.”

मंगलवार को किंगफिशर के शेयरों में 5.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जिसके बाद उनके शेयरों के दाम अब तक के सबसे निम्न स्तर पर पहुंच गए.

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