विश्व बैंक को नए अध्यक्ष की तलाश

Image caption विश्व बैंक के अध्यक्ष पर कई देशों की नजर है

अमरीका जल्द ही विश्व बैंक के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार की घोषणा कर सकता है क्योंकि नामांकन दाखिल करने का दिन नजदीक आ रहा है.

विश्व बैंक के सर्वोच्च पद के लिए भारतीय मूल की पेप्सी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंदिरा नूयी के अलावा ह्वाईट हाउस के पूर्व सहायक लॉरेंस समर्स के नाम की भी चर्चा है.

1944 में विश्व बैंक के बनने से लेकर आज तक जो कोई भी गैर अमरीकी विश्व बैंक के अध्यक्ष नहीं मनोनीत हुए हैं.

विकासशील देश भी चाहते हैं अध्यक्ष की कुर्सी

हालांकि अब कोशिश हो रही है कि विकासशील देश के लोगों को भी विश्व बैंक के सर्वोच्च पद पर बिठाया जाए.

अनुमान है कि दक्षिण अफ्रीकी देश अपने संभावित उम्मीदवार के रूप में नाइजीरिया के वित्त मंत्री न्गोजी ओकोंजो इवेला के नाम की घोषणा कर सकते हैं.

कोलम्बिया के वित्त मंत्री जोस अंतेनियो ओकांपो भी विश्व बैंक के अध्यक्ष के पद के लिए नामांकन कर सकते हैं.

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि अमरीका के पास सबसे ज्यादा 187 वोट हैं, इसलिए यह चुनाव गैर अमरीकियों के लिए पूरी तरह औपचारिकता होकर रह जाती है.

विश्व बैंक के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन शुक्रवार है.

अमरीकी दबदबा

विश्व बैंक की स्थापना 1944 में हुई थी.

विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना ब्रेटन वुड्स में सन 1944 में हुई थी जिसका उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध और विश्ववयापी आर्थिक मंदी से जूझ रहे देशों में आई आर्थिक मंदी से निपटना था.

जिस तरह अमरीकी ही विश्व बैंक के अध्यक्ष होते हैं उसी तरह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख कोई न कोई यूरोपवासी होता है.

लेकिन जैसे-जैसे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, वे अब इस पद पर दावेदारी करने लगे हैं.

इसी हफ्ते ब्राजील ने नाइजीरिया के वित्त मंत्री न्गोजी ओकोंजो इवेला के उम्मीदवारी का समर्थन करते हुए कहा था कि वे विश्व बैंक के बेहतरीन अध्यक्ष साबित हो सकते हैं.

अभी थोड़े दिन पहले विश्व बैंक के तीन पूर्व प्रमुख अर्थशास्त्रियों- फ्रानकोइस बॉर्ग्युनॉन, निकोलस स्टेर्न और जोसेफ स्टिगलिट ने कहा था कि विश्व बैंक से अमरीकी दादागिरी को खत्म होनी चाहिए.

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