यूरोप में अस्थिरता, विश्व के बाजार प्रभावित

 मंगलवार, 24 अप्रैल, 2012 को 07:32 IST तक के समाचार
यूरो

राजनीतिक और वित्तीय अस्थिरता का यूरोजोन पर खतरा लगातार बना हुआ है

नीदरलैंड्स और फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता और स्पेन की अर्थव्यवस्था के दोबारा मंदी की ओर बढ़ने के संकेतों से पूरे विश्व के शेयर बाजार सोमवार को लुढके हैं और मंगलवार तड़के भी बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.

दुनिया के वित्तीय बाजारों में निराशा छाई हुई है और निवेशकों की चिंताएँ बढ़ गई हैं.

अमरीका और यूरोप से नकारात्मक संकेत मिलने के बाद फिलिपींस, ताईवान, दक्षिण कोरिया, जापान, हॉंगकॉंग और सिंगापोर के बाजार मंगलवार को शुरुआती कारोबार में गिरे हैं.

जहाँ नीदरलैंड्स में सरकार खर्च में कटौती के मुद्दे पर सरकार गिर गई है, वहीं फ्रांस में सार्कोजी के चुनाव का पहला चरण हारने और भावी आर्थिक नीतियों के बारे अनिश्चितता और स्पेन-जर्मनी में नकारात्मक आर्थिक आंकडों के सामने आने से निराशा फैल गई है.

अमरीका, जर्मनी, फांस, भारत में गिरावट

सोमवार को जहाँ अमरीका में वॉल स्ट्रीट में एक प्रतिशत गिरावट दर्ज हुई वहीं जर्मनी के शेयर बाजार में 3.4 प्रतिशत, फ्रांस में 2.8 प्रतिशत और ब्रिटेन में 1.9 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है.

सोमवार को जापान, चीन, हॉंगकॉंग, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर में बाजार 0.1 से 0.8 प्रतिशत गिरा था.

भारत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक सेंसेक्स में लगातार दूसरे दिन बिकवाली का दौर रहा और सूचकांक 277 अंक यानी 1.6 प्रतिशत गिरा. निफ्टी पर भी 90 अंकों की गिरावट दर्ज हुई.

"स्पष्ट है कि सरकारी खर्च घटाने वाली सरकारों को जनता पसंद नहीं कर रही है. निवेशक में यूरोजोन के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है और आधिकारिक आंकड़े दिखाते हैं कि यूरोजोन की सरकारों का कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर है. स्पेन के केंद्रीय रिजर्व बैंक से इस बात की पुष्टि हुई कि स्पेन में आर्थिक मंदी छा गई है.वहाँ पहली तिमाही में विकास दर 0.4 प्रतिशत गिरी. जर्मनी में अप्रैल में देश में उत्पादन तीन साल में सबसे कम रहा है"

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता रॉबर्ट पेस्टन

डॉलर के मुकाबले में रुपए भी 42 पैसे कमजोर पड़ा और डालर की भारी मांग के चलते एक डॉलर के मुकाबले में रुपया 52.52 की कीमत पर जा पहुँचा.

फ्रांस, नीदरलैंड्स में राजनीतिक अस्थिरता

फ्रांस में राष्ट्रपति चुनावों के पहले चरण में राष्ट्रपति निकोला सार्कोजी अपने प्रतिद्वंद्वी फ्रांस्वा ओलांड से हार गए. हालाँकि अभी दूसरे चरण का मतदान होना है लेकिन पहले चरण के नतीजे के बाद यूरोपीय संघ में बुलंद आवाज और पुख्ता अर्थव्यवस्था वाले फ्रांस की आने वाले दिनों में यूरोजोन से संबंधित नीतियों पर सवाल खड़े हो गए हैं.

इससे वित्तीय नीतियों के संभावित बदलाव और अस्थिरता को हवा मिली है. उधर नीदरलैंड्स में सरकार की सहयोगियों और विपक्षी नेताओं बजट संबंधी वार्ताएँ विफल रहीं.

नीदरलैंड्स की सरकार जनता पर किए जाने वाले खर्चों में कटौती करना चाहती थी लेकिन फ्रीडम पार्टी जो सरकार को बाहर से समर्थन दे रही है, इसके पक्ष में नहीं है. सोमवार शाम तक नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री मार्क रूट ने महारानी बेट्रिक्स को अपना इस्तीफा सौंप दिया. अब वहां दोबारा चुनाव होंगे.

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता रॉबर्ट पेस्टन के अनुसार, "स्पष्ट है कि सरकारी खर्च घटाने वाली सरकारों को जनता पसंद नहीं कर रही है. निवेशक में यूरोजोन के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है और आधिकारिक आंकड़े दिखाते हैं कि यूरोजोन की सरकारों का कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर है."

पेस्टन के अनुसार जहाँ यूरोप के बाजारों में शेयर तीन प्रतिशत से अधिक गिरे वहीं जर्मनी के सरकारी बॉंड, जो सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, उनकी कीमत बढ़ी.

ऐसा इसलिए हुआ कि पर्चेज मैनेजर्स इंडेक्स के सर्वेक्षण से संकेत मिले कि यूरोजोन में आर्थिक मंदी सातवें महीने में प्रवेश कर रही है.

इतना ही नहीं स्पेन के केंद्रीय रिजर्व बैंक से इस बात की पुष्टि हुई कि स्पेन में आर्थिक मंदी छा गई है.वहाँ पहली तिमाही में विकास दर 0.4 प्रतिशत गिरी. किसी देश को आर्थिक मंदी में तक माना जाता है जब लगातार दो तिमाही में उसकी विकास दर शून्य से कम रहती है.

जर्मनी में पर्चेज मैनेजर्स इंडेक्स से पता चला है कि अप्रैल में देश में उत्पादन तीन साल में सबसे कम 46.3 अंक रहा है. ये जब भी 50 से कम रहता है तो माना जाता है कि अर्थव्यवस्था सिकुड़ रही है.

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