भारत:पाँच वर्ष में रोजगार मात्र 0.1 फीसद बढ़ा

Image caption आईएलओ के मुताबिक भारत में हर उम्र के वर्ग में महिलाएँ शिक्षित हो रही हैं.

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने अपनी रिपोर्ट में विश्व में रोजगार की स्थिति पर गहरी चिंता जताई है. रिपोर्ट के मुताबिक अगर अगले दशक में बेरोजगारों की संख्या और बढ़ने से बचना है तो 60 करोड़ से ज्यादा नई नौकरियों की जरूरत है.

भारत की आर्थिक प्रगति और रोजगार अवसरों के संदर्भ में इस रिपोर्ट में दिलचस्प आँकड़े सामने आए हैं.

बेरोजगारी भयानक स्तर पर

रिपोर्ट के मुताबिक 2004/2005 से लेकर 2009/2010 तक भारत में रोजगार अवसरों में मात्र 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि श्रमिक उत्पादकता 34 फीसदी बढ़ी है.

'शिक्षित हो रही हैं महिलाएँ'

श्रमिक उत्पादकता और रोजगार अवसरों के बीच इस खाई का एक बड़ा कारण मजदूर कार्यबल में महिलाओं की गिरती भागीदारी को बताया गया है.

भारत की बात करें तो ग्रामीण इलाकों में 2004/2005 में महिला मजदूरों की भागीदारी 49.4 फीसदी थी जबकि 2009/2010 में ये घटकर 37.8 फीसदी रह गई है.

शहरों में 2004/2005 में ये प्रतिशत 24.4 से घटकर 2009/2010 में 19.4 फीसदी रह गया.

अगर आईएलओ के आँकड़ों को आधार माना जाए तो क्या वजह है कि बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था में महिला मजदूरों की संख्या घट रही है. सेंटर फॉर विमेन डिवेलेपमेंट स्टीडज़ में वरिष्ठ अध्येता नीता कहती हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार पूंजी आधारित अर्थव्यवस्था होती जा रही है जिसमें मजदूरों की जगह और जरूरत कम हो रही है.

बीबीसी संवाददाता वंदना से बातचीत में उन्होंने कहा, "ये बात बिल्कुल सही है कि महिला रोजगार संकट में हैं. पूंजी आधारित अर्थव्यवस्था में महिला मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं. उनके लिए ये मौके कुछ क्षेत्रों तक सीमित हो गए हैं. कृषि जैसे क्षेत्रों में अब उतनी मजदूरी नहीं बची. वहाँ से लोगों को निकाला जा रहा है. लेकिन ये महिलाएँ अभी दूसरे क्षेत्रों जैसे सर्विसिस सेक्टर में काम नहीं कर सकतीं क्योंकि उनके पास उतनी योग्यता नहीं है. नतीजा ये है कि महिला मजदूरों की संख्या कम होती जा रही है."

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन में ये भी कहा गया है कि महिला मजदूरों की गिरती संख्या का एक ये भी है कि महिलाएँ स्कूल जा रही हैं, शिक्षित हो रही हैं. लेकिन सेंटर फॉर विमेन डिवेलेपमेंट स्टीडज़ में वरिष्ठ अध्येता नीता इससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं.

वे कहती हैं, "शिक्षित महिलाओं को दूसरे क्षेत्रों में नौकरियाँ मिल रही हैं लेकिन ये नौकरियाँ उस अनुपात में नहीं है जितने अनुपात में महिला मजदूर अपनी नौकरी खो रही हैं. इसे सुधारने के लिए मनरेगा जैसी और योजनाएँ लागू करनी होंगी ताकि महिला मजदूरों का काम मिलता रहे."

भारत में 2011 में विकास दर 7.8 फीसदी, श्रीलंका में सात फीसदी और बांग्लादेश में 6.1 फीसदी रही है जबकि पाकिस्तान की विकास दर 2.6 फीसदी ही रही है.

आईएलओ रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में चुनौती दोहरी है- एक तो कारीगर कार्यक्षमता बढ़ानी है और दूसरा नौकरियों के अवसर पैदा करने हैं.

संगठन ने चेतावनी दी है कि पूरी दुनिया में बेरोजगारी की स्थिति 'भयानक' है और इसमें जल्द कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है.

आईएलओ के मुताबिक रोजगार के कुछ नए अवसर भी होगें, लेकिन वे अंशकालिक और कम तनख्वाह वाले होंगे. कुल मिलाकर वह बेरोजगारी की तुलना में नाम मात्र का होगा

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