फ्रांस, ग्रीस के नतीजों से यूरोजोन में चिंता

यूरोजोन (फाइल फोटो)
Image caption ग्रीस के चुनावी नतीजों से यूरोजोन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं

फ्रांस और ग्रीस में हुए चुनावों के नतीजे दिखाते हैं कि राजनीतिक बदलाव के साथ-साथ मतदाताओं ने सरकारी खर्च में कटौती की नीति को खारिज किया है. इससे यूरोजोन के कर्ज संकट पर दूरगामी असर हो सकता है.

फ्रांस में सार्कोजी की मात और सोशलिस्ट उम्मीदवार फ्रांस्वा की जीत से यूरोजोन के कर्ज संकट पर जर्मनी-फ्रांस की सरकारी खर्च घटाने की संयुक्त रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं.

भारत समेत एशियाई बाजारों में गिरावट

दूसरी ओर ग्रीस में कटौती विरोधी पार्टियों की जीत दिखाती है कि वोटर ग्रीस को दिए गए सहायता पैकेज के बदले सरकारी खर्च में कटौती की शर्त से खासे नाखुश हैं. अब तो संदेह पैदा हो गया है कि क्या ग्रीस यूरोजोन में बना रहेगा?

इस पूरी अनिश्चितता का वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों पर बुरा असर हो रहा है. एशिया में सोमवार को हॉंग कॉंग, दक्षिण कोरिया, जापान के शेयर बाजारों में गिरावट आई है. दिन को कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स एक समय तो 290 अंक गिर गया.

यही नहीं, यूरो में पिछले तीन महीने सबसे अधिक गिरावट देखी गई है और एक यूरो की कीमत 1.29 डॉलर हो गई. तेल की कीमत में भी गिरावट आई है और ब्रेंट कच्चा तेल प्रति बैरल एक प्रतिशत गिरा है.

ग्रीस: कटौती न मानी तो सदस्यता को खतरा

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता एंड्रयू वॉकर के अनुसार फ्रांस और ग्रीस की घटनाओं में से ग्रीस के नतीजे यूरो के भविष्य के लिए ज्यादा उथल-पुथल पैदा करने वाला हो सकता है.

फ्रांस में बदवाल, ओलांड ने सार्कोजी को पटखनी दी

उनका कहना है, "यदि ग्रीस को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद न मिलती तो वह अपना खर्च नहीं चला सकता था. लेकिन उसे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद इस शर्त पर मिली है कि वह सरकारी खर्च में कटौती करेगा. अब सवाल ये उठता है कि क्या नई सरकार कटौती की नीतियों को खारिज कर देगी? यदि ऐसा होता है तो बाकी के यूरोजोन और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को तय करना होगा कि सहायता पैकेज जारी रहेगा या नहीं. इसका मतलब ग्रीस का यूरोजोन से बहिरगमन भी हो सकता है."

हालाँकि एंड्रयू वॉकर ये भी कहते हैं कि फिलहाल स्थिति ग्रीस के यूरोजोन से बहिरगमन से काफी दूर है और हमें यूरोजोन के नेताओं के यूरोजोन को एकजुट रखने की इच्छाशक्ति को कम नहीं आंकना चाहिए.

अन्य पर्यवेक्षकों का मानना है कि ग्रीस अपने राहत पैकेज और सरकारी खर्च में कटौती के कदमों पर दोबारा चर्चा कर सकता है.

फ्रांस का जोर कटौती नहीं, विकास पर

उधर फ्रांस में फांस्वा ओलांड आर्थिक विकास पर ज्यादा जोर देना चाहते हैं.

कुछ हफ्ते पहले लग रहा था कि यूरोप में फ्रांस-जर्मनी के बीच सहमति और चर्चा के बाद बनी नीति में सोशलिस्ट उम्मीदवार की जीत के बाद उथल-पुथल हो सकती है.

एंड्रयू वॉकर के अनुसार अब प्रतीत होता है कि यूरोजोन की प्राथमिकताएँ व्यापक स्तर पर बदल रही हैं और सरकारी खर्च में कटौती की जगह विकास पर जोर दिया जा रहा है.

लेकिन बीबीसी संवाददाता गेविन ह्यूइट के अनुसार, "फ्रांस्वा ओलांड विकास को प्राथमिकता बनाना चाहते हैं. ऐसे कहने से वे यूरोजोन में एंगेला मर्कल के नेतृत्व को चुनौती दी रहे हैं. जर्मनी से मिल रहे संकेत के अनुसार जर्मनी विकास की नई संधी को समर्थन तो दे सकते हैं लेकिन कुछ समय तक तो फ्रांस-जर्मनी के रिश्तों के बारे में अनिश्चितता बनी रहेगी."

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