फेसबुक के शेयरों में उम्मीद से कम उछाल

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सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने शुक्रवार को शेयर बाजार में अपना पहला कदम रखा. लेकिन कारोबार के पहले दिन कंपनी के शेयरों में उम्मीद से कम उछाल देखा गया.

फेसबुक के शेयर नैसडैक पर पंजीकृत हुए हैं जहाँ तकनीकी कंपनियों - गूगल, ऐपल आदि के शेयरों की खरीद-बिक्री होती है.

नेसडैक के खुलते ही फेसबुक के शेयरों की कीमत में 10 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखा गया. शुरुआती कारोबार में शेयरों की कीमत 42 डॉलर तक पहुँच गई थी पर बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई. कारोबार बंद होने के समय फेसबुक के शेयर अपनी शुरुआती आईपीओ कीमत 38 डॉलर से कुछ ज्यादा कीमत (38.23 डॉलर) पर बंद हुए.

आठ साल पुरानी फेसबुक के आईपीओ (शुरुआती शेयरों) के शुक्रवार को बाजार में आने से पहले, भारी मांग के चलते उसके शेयरों की शुरुआती कीमत लगातार बढ़ाई गई और अंत में हर शेयर 38 डॉलर का बिका था. भारी माँग के कारण कारोबार देर से शुरु हुआ.

फेसबुक के शेयर बाजार में उतरने के साथ ही कंपनी की कीमत 104 अरब डॉलर लगाई गई है जिससे वो दुनिया की सबसे कीमती तकनीकी कंपनी बन गई है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पहले कारोबारी दिन के नतीजे संकेत देते हैं कि निवेशकों को नहीं लगता कि कंपनी की कीमत 104 अरब डॉलर होगी. हालांकि संवाददाताओं का ये भी कहना है कि ये बुरी किस्मत का मामला भी हो सकता है क्योंकि फेसुबक ने ऐसे समय अपने शेयर बाजार में उतारे हैं जब आर्थिक मंदी की चिंता के कारण बाजार में ऐसे भी उथल पुथल मची हुई है.

फेसबुक की कीमत के आकलन के मुताबिक ये इंटरनेट शॉपिंग कंपनी एमेजॉन के बराबर और डिजनी से अधिक कीमती है.

अमरीका के इतिहास में फेसबुक के शुरुआती शेयरों की पेशकश यानी आईपीओ तीसरा सबसे बड़ा है. केवल वित्तीय दिग्गज वीजा और मोटरकार बनाने वाली कंपनी जनरल मोटर्स के आईपीओ इससे बड़े थे.

बाजार में 20 प्रतिशत शेयर ही

फेसबुक के मालिक कंपनी के कुल शेयरों में से केवल 20 प्रतिशत यानी 42.1 करोड़ को बाजार में दे रहे हैं जिससे वे लगभग 18 अरब डॉलर अर्जित कर पाएँगे.

पुस्तक 'द फेसबुक इफेक्ट' के लेखक डेविड कर्कपेट्रिक कहते हैं कि फेसबुक इस्तेमाल करने वालों की तो सेना है जो उसके शेयर धारक भी बन सकते हैं और इसके शेयर की कीमत को आगे से आगे बढ़ा सकते हैं.

उनका कहना है, "लोग फेसबुक के शेयरों के इसलिए मालिक बनना चाहते हैं क्योंकि वे इससे खासे जुड़े हुए हैं. मैं देखता हूँ कि अनेक लोग पूरा समय फेसबुक को ही दे देते हैं."

कमाई के बारे में शंकाएँ

फेसबुक ने ये माना है कि मोबाइल फोन पर इसके इस्तेमाल से उसे खासा मुनाफा हुआ है. इससे कई लोगों के मन में ये शंका है कि ऐसे प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देने-दिखाने की कितनी गुंजाइश है.

कार कंपनी जनरल मोटर्स ने इन शंकाओं को बढ़ावा दिया है और कहा है कि वह फेसबुक पर विज्ञापन देने के लिए पैसा नहीं देगा.

लेकिन बीबीसी को दिए इंटरव्यू में विज्ञापन की दुनिया के बड़े खिलाड़ी डब्ल्यूपीपी के मुख्य कार्यकारी मार्टिन सोरेल ने कहा, "हमें पता है कि हमारा उद्योग एक खरब डॉलर से अधिक है. हमें पता है कि इस कुल राशि का लगभग 20 प्रतिशत इंटरनेट पर होता है."

उनका कहना है, "हमें ये भी पता है कि लोग अपने समय में से लगभग एक-तिहाई इंटरनेट पर गुजारते हैं, इसलिए फेसबुक के लिए अपार अवसर मौजूद हैं."

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