यूरोप में कारोबार तीन साल के निचले स्तर पर

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Image caption अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यूरोप का भरोसा डगमगाने की वजह ग्रीस का संकट है

एक सर्वेक्षण के मुताबिक यूरोप में कारोबारी गतिविधियां मई में तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं.

सर्वे करने वाली फर्म मार्किट के अनुसार चीन की अर्थव्यवस्था पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं. गुरूवार को जारी आंकड़ों से संकेत मिलता है कि देश में निर्माण गतिविधियां सुस्त हो गई हैं.

शुरूआती आंकड़ो से पता चलता है कि एचएसबीसी के मासिक पर्चेसिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) ने कारखानों से हो रहे उत्पादन में गिरावट आने के संकेत दिए हैं.

चीन में विकास दर सालाना आठ प्रतिशत से ऊपर है लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था अपनी गति खो रही है. उत्पादन में गिरावट का ये लगातार सातवां महीना है. वैश्विक आर्थिक संकट की शुरुआत होने के बाद से चीन की ये अब तक की सबसे बुरी स्थिति है.

यूरोप की बात करें तो निर्माण और सेवा क्षेत्र के प्रबंधकों के सर्वेक्षण के आधार पर मार्किट का सूचकांक मई में गिरकर 45.9 पर आ गया जो 35 महीने का न्यूनतम स्तर है.

वहीं एक यूरो का मूल्य गिरकर 1.2515 डॉलर हो गया जो बीते 22 महीनों सबसे कम है.

यूरोप के नेताओं में असहमति

यूरोप के नेता भले ही बुधवार को एकजुट हुए, लेकिन इससे भरोसा नहीं बढ़ा क्योंकि नेताओं में इस बात पर सहमति नहीं बन पाई कि इस संकट से आखिर कैसे निपटा जाए.

फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांड ने इस बात पर जोर दिया कि वित्तीय संकट से जूझ रहे देशों को कम से कम ब्याज दर पर धन मिले.

लेकिन जर्मनी का कहना है कि वो ऐसी किसी योजना का विरोध करेगा क्योंकि यूरोप में बजट को लेकर अनुशासन नहीं है.

यूरोप के नेताओं ने ग्रीस के संकट पर भी विचार-विमर्श किया.

इन नेताओं का कहना है कि वे चाहते हैं कि ग्रीस यूरोजोन में बरकरार रहे लेकिन यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हर्मन वेन रोम्पाई का कहना है कि ग्रीस को अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए.

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, गुरुवार को आईं आर्थिक रिपोर्टें बताती हैं कि ग्रीस को लेकर जो चिंताएं हैं, उनका व्यापक आर्थिक असर पड़ रहा है.

मार्किट के मुख्य अर्थशास्त्री क्रिस विलियमसन का कहना है कि उनकी कंपनी के शोध से संकेत मिलता है कि यूरोप की आर्थिक मंदी मई में और बढ़ रही है.

उन्होंने एक रिपोर्ट में कहा है, ''ये सर्वेक्षण मोटे तौर पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर आधारित है. दूसरी तिमाही में इसमें कम से कम 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई है.''

मार्किट सर्वेक्षण में कहा गया है कि फ्रांस और जर्मनी के कारखानों से उत्पादन बीते तीन वर्षों में सबसे निचले स्तर पर चला गया है.

'हालात अच्छे नहीं'

आईएनजी बैंक के मार्टिन वेन कहते हैं, ''पीएमआई के मई के आंकड़े डरावने हैं और स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि यूरोजोन की जीडीपी दूसरी तिमाही में सिकुड़ रही है.''

वहीं कॉमर्सबैंक के पीटर डिक्सन कहते हैं, ''ये अच्छे हालात नहीं हैं.''

वे कहते हैं, ''ये इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ग्रीस का संकट गहराता जा रहा है और अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ रहा है.''

एक अन्य रिपोर्ट कहती है कि मई में जर्मनी में कारोबारी भरोसा बुरी तरह डगमगाया है.

इन हालात में निवेशक जर्मनी और ब्रिटेन की सरकार के बांड्स में अपना भरोसा दिखा रहे हैं. इन बांड्स की कीमतें बढ़ी हैं. इससे इन दोनों देशों का सरकारी कर्ज कम हुआ है.

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